दिल्ली में इको-गणपति के ऑर्डर्स में 1,718% का उछाल, फूलों की मांग सुबह 7:42 बजे पहुंची चरम पर

नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस वर्ष देशभर में पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं और पारंपरिक मिठाइयों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध ऑर्डर आंकड़ों के अनुसार, इको-फ्रेंडली मिट्टी के गणपति की मांग सालाना आधार पर 176 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मावा फ्लेवर वाले मोदक के ऑर्डर्स में 145 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

त्योहारी खरीदारी के मामले में बेंगलुरु सबसे आगे रहा। इसके बाद मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई का स्थान रहा। दिल्ली, पुणे, कोलकाता, गुड़गांव और कोच्चि समेत अन्य शहरों में भी गणेश चतुर्थी से जुड़ी सामग्री की मांग में तेजी देखी गई।

इको-गणपति की ओर बढ़ा रुझान

इस बार गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी में पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों का प्रभाव साफ दिखाई दिया। कुल इको-गणपति मांग में तैयार मिट्टी की मूर्तियों की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत रही। इसके बाद ‘पेंट-योर-ओन’ यानी खुद रंगने वाली इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग रही।

इको-गणपति की मांग में सबसे तेज वृद्धि पारंपरिक गणेश उत्सव वाले प्रमुख शहरों के अलावा अन्य बाजारों में दर्ज की गई।

दिल्ली में इको-गणपति के ऑर्डर्स 1,718 प्रतिशत, कोलकाता में 1,305 प्रतिशत, नोएडा में 1,136 प्रतिशत और भुवनेश्वर में 1,132 प्रतिशत बढ़े।

ये आंकड़े गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों के प्रति बढ़ती उपभोक्ता रुचि को दर्शाते हैं।

मावा मोदक सबसे आगे

गणेश चतुर्थी पर मोदक की मांग में भी तेजी रही। मावा मोदक के ऑर्डर्स में सालाना आधार पर 145 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह सबसे अधिक ऑर्डर किया जाने वाला फ्लेवर रहा।

मावा के बाद क्लासिक, केसर, काजू, असॉर्टेड और आम फ्लेवर के मोदक पसंद किए गए।

शहरों के अनुसार मोदक की पसंद भी अलग रही। बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में मावा मोदक सबसे आगे रहा। वहीं दिल्ली और गुड़गांव में केसर मोदक की मांग अधिक रही।

पुणे, चेन्नई, कोलकाता और नागपुर में क्लासिक मोदक को प्राथमिकता मिली, जबकि सेंट्रल गोवा में काजू मोदक सबसे पसंदीदा रहा।

सुबह से शुरू हुई पूजा की तैयारी

गणेश चतुर्थी के दिन पूजा सामग्री की मांग भी अलग-अलग समय पर अपने चरम पर पहुंची।

सुबह 7:42 बजे फूलों के ऑर्डर्स सबसे अधिक रहे। इस दौरान प्रति मिनट 868 ऑर्डर दर्ज किए गए।

इसके बाद सुबह 8:48 बजे पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की डिलीवरी अपने चरम पर पहुंची। इसी दौरान परिवारों ने घर में बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी कीं।

सुबह 9:45 बजे कपूर, रुई की बत्ती और अगरबत्ती जैसी पूजा सामग्री की मांग सबसे अधिक रही।

वहीं, सुबह 10:39 बजे मोदक के ऑर्डर्स पीक पर पहुंचे। इस दौरान मावा मोदक सबसे आगे रहा, उसके बाद केसर और क्लासिक मोदक की मांग रही।

परंपरा के साथ पर्यावरण का संदेश

गणेश चतुर्थी के इस वर्ष के ऑर्डर आंकड़ों में एक ओर पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की बढ़ती मांग दिखाई दी, तो दूसरी ओर मावा मोदक जैसे पारंपरिक स्वाद की लोकप्रियता भी कायम रही।

फूलों से लेकर गणेश प्रतिमा, पूजा सामग्री और मोदक तक ऑर्डर्स के समय में आया बदलाव त्योहार की तैयारियों की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। यह बताता है कि भक्ति और परंपरा के साथ पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को लेकर भी लोगों की पसंद बदल रही है।

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