नई दिल्ली। भारत का MSME क्रेडिट परिदृश्य तेजी से मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग के हाई-डेंसिटी इंडस्ट्रियल क्लस्टरों की ओर बढ़ रहा है। CRIF High Mark की नवीनतम MSMEx Spotlight – Special Edition: Cluster & Industrial Activity Analysis रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक देश का कुल MSME क्रेडिट पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग ₹47.4 लाख करोड़ पहुंच गया है, जिसमें सालाना आधार पर 12.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेडिट ग्रोथ में छोटे और मध्यम एक्सपोज़र वाले कारोबारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छोटे एक्सपोज़र वाले कारोबारों के पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग में सालाना 20.3 प्रतिशत, जबकि मध्यम एक्सपोज़र वाले कारोबारों में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं माइक्रो सेगमेंट में अपेक्षाकृत स्थिरता रही। हालांकि, माइक्रो एक्सपोज़र वाले कारोबार जून 2026 तक सभी सक्रिय लोन खातों का 84.4 प्रतिशत हिस्सा बने हुए हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग में मजबूत वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग में सालाना 17.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके बाद ट्रेडिंग सेक्टर में 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं सर्विसेज सेक्टर में वृद्धि केवल 0.2 प्रतिशत रही और यह क्षेत्र लगभग स्थिर बना रहा।
मैन्युफैक्चरिंग के भीतर इंजीनियरिंग और मशीनरी का पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग में सबसे बड़ा हिस्सा रहा। इसके बाद एग्रो प्रोडक्ट्स एवं फॉरेस्ट्री, केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल्स का स्थान रहा। ट्रेडिंग में रिटेल और होलसेल ट्रेड प्रमुख गतिविधियां बनी हुई हैं।
इंजीनियरिंग और मशीनरी क्लस्टर तेजी से बढ़े
CRIF High Mark के विश्लेषण के अनुसार, इंजीनियरिंग और मशीनरी क्षेत्र में ₹1,000 करोड़ से अधिक पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग वाले हाई-डेंसिटी जिलों की संख्या पिछले तीन वर्षों में 24 से बढ़कर 47 हो गई है। जून 2026 तक इन क्लस्टरों की हिस्सेदारी इस सेक्टर के कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो में 63.5 प्रतिशत रही।
यह बदलाव दर्शाता है कि इंजीनियरिंग और मशीनरी से जुड़े कारोबार तेजी से स्थापित औद्योगिक केंद्रों में केंद्रित हो रहे हैं।
केमिकल सेक्टर में क्रेडिट का बड़ा हिस्सा प्रमुख क्लस्टरों में
केमिकल सेक्टर में भी क्रेडिट का बड़ा हिस्सा कुछ प्रमुख क्लस्टरों में केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर के कुल क्रेडिट का 53.1 प्रतिशत हिस्सा 24 बड़े क्लस्टरों से आता है। जून 2026 में अहमदाबाद और मुंबई इस क्षेत्र के प्रमुख हब के रूप में सामने आए।
टेक्सटाइल उद्योग पारंपरिक केंद्रों पर कायम
टेक्सटाइल सेक्टर में क्लस्टर पैटर्न में अपेक्षाकृत कम बदलाव देखने को मिला है। सेक्टर के कुल क्रेडिट का 60.8 प्रतिशत हिस्सा 15 प्रमुख क्लस्टरों में केंद्रित है। इनमें सूरत सबसे प्रमुख केंद्र रहा, जिसका जून 2026 में सेक्टर के कुल पोर्टफोलियो में 19.4 प्रतिशत योगदान रहा।
होलसेल ट्रेड में क्लस्टरों का तेजी से विस्तार
होलसेल ट्रेड में हाई-वॉल्यूम जिलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले तीन वर्षों में ऐसे जिलों की संख्या 54 से बढ़कर 119 हो गई। जून 2026 में इन जिलों की हिस्सेदारी होलसेल ट्रेड के कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो में 71.7 प्रतिशत रही।
वहीं रिटेल ट्रेड में भी क्रेडिट का भौगोलिक विस्तार हुआ है। हाई-वॉल्यूम जिलों की संख्या 143 से बढ़कर 189 हो गई और जून 2026 में इनकी हिस्सेदारी सेक्टर के क्रेडिट पोर्टफोलियो में 75.1 प्रतिशत रही।
प्रमुख क्लस्टरों में प्राइवेट बैंकों की अहम भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, सूरत, अहमदाबाद, तिरुप्पुर और राजकोट जैसे प्रमुख औद्योगिक एवं ट्रेडिंग हब में प्राइवेट बैंक महत्वपूर्ण लेंडर बने हुए हैं। वहीं केमिकल जैसी कुछ औद्योगिक गतिविधियों में NBFCs की हिस्सेदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
CRIF High Mark के इस विश्लेषण से संकेत मिलता है कि भारत का MSME क्रेडिट बाजार तेजी से अधिक संगठित और भौगोलिक रूप से केंद्रित हो रहा है। स्थापित इंडस्ट्रियल और ट्रेडिंग हब की ओर बढ़ता क्रेडिट प्रवाह वित्तीय संस्थानों के लिए जिला और उद्योग-स्तरीय डेटा के महत्व को भी बढ़ा रहा है। इससे उभरते क्रेडिट ट्रेंड और अलग-अलग क्षेत्रों में पोर्टफोलियो प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

