नई दिल्ली: फोर्सेस (फोरम फॉर क्रेचेज़ एंड चाइल्डकेयर सर्विसेज़ – FORCES) की ओर से आयोजित वार्षिक चाइल्डकेयर चैंपियंस अवॉर्ड्स के मौके पर अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने अंतरराष्ट्रीय देखभाल एवं सहयोग दिवस (International Day of Care and Support) के कार्यक्रम में हिस्सा लिया और 14 चाइल्डकेयर चैंपियंस को सम्मानित किया। इन केयर वर्कर्स को छोटे बच्चों की देखभाल और उनके शुरुआती विकास में अहम योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया। देश के अलग-अलग राज्यों से आए इन केयर वर्कर्स ने अपना जीवन छोटे बच्चों की देखभाल और उनकी बेहतर परवरिश के लिए समर्पित किया है।
इस पुरस्कार समारोह के ज़रिए भारत में केयर वर्कर्स के उस महत्वपूर्ण योगदान को सामने लाया गया, जिसे लंबे समय से उतनी पहचान और अहमियत नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए। सम्मान समारोह के साथ-साथ नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भारत में केयर वर्कर्स की स्किलिंग और ट्रेनिंग से जुड़ी मौजूदा कमियों पर चर्चा की। साथ ही, देशभर में अच्छी गुणवत्ता वाली चाइल्डकेयर सेवाओं का विस्तार करने और इस काम को एक पेशे के तौर पर विकसित करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सम्मान समारोह में अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने कहा, “इस अंतरराष्ट्रीय देखभाल एवं सहयोग दिवस पर मैं उन महिलाओं के योगदान का सम्मान करना चाहती हूँ, जो हर दिन दूसरों की देखभाल करती हैं। इनमें हमारी आंगनवाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स और चाइल्डकेयर वर्कर्स शामिल हैं। देखभाल करना एक योग्यता का काम है। इस काम को पहचान, सम्मान और उचित मेहनताना मिलना चाहिए।”
समारोह में कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी हिस्सा लिया।
डॉ. एम. श्रीनिवास, सदस्य, नीति आयोग (NITI Aayog) ने कहा, “नीति आयोग ‘केयरप्रेन्योर्स’ (CAREpreneurs) के ज़रिए उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले एक कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे नए वर्कफोर्स मॉडल को बढ़ावा देना है, जिनमें देखभाल से जुड़े कौशल के साथ बिज़नेस और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाए। इससे महिलाओं के नेतृत्व में छोटे उद्यम शुरू करने और समुदाय के स्तर पर देखभाल सेवाएँ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह मॉडल देखभाल के नए समूह (care circle) बनाने और महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।”
न्यायमूर्ति गीता मित्तल (सेवानिवृत्त) ने कहा, “स्किलिंग से मिलने वाले फायदों की बात करने से पहले हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि योग्यता और ट्रेनिंग के आधार पर उचित रोज़गार मिले। केयर वर्कर्स को कुशल श्रमिकों के बराबर मज़दूरी मिलनी चाहिए। इसे कोई अतिरिक्त लाभ नहीं, बल्कि उनका बुनियादी अधिकार माना जाना चाहिए।”
शोको इशिकावा, भारत में यूएन वीमेन (UN Women) की कंट्री रिप्रेज़ेंटेटिव, ने कहा, “बच्चों, बुज़ुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल एक महत्वपूर्ण काम है, जिसके लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है। भारत ने 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह देश में केयर वर्कफोर्स को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। नीति आयोग के सुझाव को आगे बढ़ाते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तय मापदंडों के अनुसार योग्यताओं, व्यावहारिक ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन के साथ अच्छे रोज़गार के अवसर, सामाजिक सुरक्षा और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते भी जुड़ें। यह बच्चों, बुज़ुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल से जुड़े सभी क्षेत्रों के लिए ज़रूरी है।”
भारत में चाइल्डकेयर सेवाओं का विस्तार क्यों ज़रूरी है?
हाल के आर्थिक आकलनों से पता चलता है कि भारत में देखभाल सेवाओं की बढ़ती ज़रूरतें देश के लिए निवेश का एक बड़ा अवसर हैं। साथ ही, इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित केयर वर्कर्स तैयार करना भी एक अहम चुनौती है।
भारत में 14 साल से कम उम्र के लगभग 35 करोड़ बच्चे हैं। इसके अलावा, शहरी परिवारों की बनावट और ज़रूरतें भी तेज़ी से बदल रही हैं। ऐसे में अनुमान है कि 2050 तक भारत को 3.1 से 3.8 करोड़ औपचारिक केयर वर्कर्स की ज़रूरत होगी। इनमें से करीब 1.5 से 2.2 करोड़ वर्कर्स की आवश्यकता अकेले चाइल्डकेयर सेवाओं के लिए होगी।
आने वाले वर्षों में चाइल्डकेयर वर्कर्स की प्रोफेशनल ट्रेनिंग और स्किलिंग में निवेश करना बेहद ज़रूरी होगा। यह सिर्फ़ शिक्षा या सामाजिक कल्याण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे लाखों महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं और देश के बच्चों को बेहतर देखभाल और विकास के अवसर मिल सकते हैं।

