नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर) तिरुपति ने अपनी साझेदारी को और मजबूत करते हुए एक नई ड्यूल डिग्री शुरू की है। इस डिग्री के जरिए प्रतिभाशाली छात्र रिसर्च पर केंद्रित विज्ञान की पढ़ाई कर सकेंगे और दुनिया भर के वैज्ञानिक जगत से भी जुड़ेंगे।
दिल्ली स्थित मेलबर्न ग्लोबल सेंटर में घोषित बैचलर ऑफ साइंस इंटीग्रेटेड (ऑनर्स) 2+2 ड्यूल डिग्री में दो रिसर्च-केंद्रित संस्थानों की ऐसी खूबियां एक साथ आती हैं, जो एक-दूसरे को पूरा करती हैं। दोनों संस्थानों की सोच एक है कि विज्ञान समाज की तरक्की और आर्थिक विकास को रफ्तार देता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के प्रो वाइस-चांसलर (ग्लोबल) प्रोफेसर फ्रैंक वेटेरे ने कहा कि यह नया प्रोग्राम उभरते वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का अनोखा मौका देगा, और साथ ही उन्हें दुनिया की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी कौशल भी सिखाएगा।
प्रोफेसर वेटेरे ने कहा, “यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और आईसर तिरुपति मिलकर वैश्विक नजरिए वाले वैज्ञानिकों की ऐसी नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, जो उन चुनौतियों के समाधान में योगदान दे सके, जो किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। भारत का वैज्ञानिक समुदाय ऊर्जा से भरा है और तेजी से बढ़ रहा है।”
उन्होंने कहा, “इस तरह की साझेदारियों से दोनों संस्थानों को एक-दूसरे से सीखने, अपनी विशेषज्ञता साझा करने और हमारे दोनों देशों के बीच रिसर्च और शिक्षा के रिश्तों को मजबूत करने के बेहतरीन अवसर मिलते हैं।”
नए प्रोग्राम के तहत भारतीय छात्र पहले दो साल आईसर तिरुपति में पढ़ेंगे और आखिरी दो साल ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में। पढ़ाई पूरी होने पर उन्हें दुनिया के दो प्रतिष्ठित संस्थानों से दो बैचलर ऑनर्स डिग्रियां मिलेंगी।
छात्र बायोटेक्नोलॉजी, केमिस्ट्री, इकोसिस्टम साइंस, एनवायरनमेंटल साइंस, फूड साइंस, जेनेटिक्स, फिजिक्स और प्लांट साइंस समेत कई विषयों में से अपना मुख्य विषय (मेजर) चुन सकते हैं।
डिग्री पूरी करने के बाद छात्रों के लिए पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई का रास्ता भी आसान रहेगा। वे मास्टर डिग्री में दाखिला ले सकेंगे, और एडवांस्ड स्टैंडिंग यानी पहले की पढ़ाई का क्रेडिट मिलने से मुमकिन है कि वे इसे कम समय में पूरा कर लें।
इस डिग्री में दाखिला लेने वाले छात्र अपने आप साइंस ग्लोबल स्कॉलर्स प्रोग्राम का हिस्सा बन जाएंगे। इस प्रोग्राम का मकसद रिसर्च में सहयोग मजबूत करना, प्रतिभाओं की एक देश से दूसरे देश में आवाजाही आसान बनाना, और इनोवेशन व वैज्ञानिक आदान-प्रदान के नए मौके तैयार करना है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न में डीन ऑफ साइंस प्रोफेसर मोइरा ओ’ब्रायन ने कहा कि यह पहल विज्ञान शिक्षा के भविष्य में एक अहम निवेश है और इससे ऑस्ट्रेलिया और भारत के रिश्ते और गहरे होते हैं।
प्रोफेसर ओ’ब्रायन ने कहा, “विश्वस्तरीय रिसर्च क्षमता, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज से जुड़ाव, इन तीनों को साथ लाकर हम वैज्ञानिक आदान-प्रदान का एक मंच बना रहे हैं, और ऐसे वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स की अगली पीढ़ी गढ़ रहे हैं, जो आने वाले कल की चुनौतियों का हल निकाल सकें।”
उन्होंने कहा, “छात्रों को ऐसी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का फायदा मिलेगा, जिसकी नींव ऊंचे शैक्षिक मानकों और रिसर्च पर आधारित पढ़ाई पर टिकी है।”
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर) तिरुपति के निदेशक प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य ने कहा कि यह पहल देश के उस मिशन को आगे बढ़ाती है, जिसका लक्ष्य दुनिया के साथ ज्ञान, मूल्यों और इनोवेशन का आदान-प्रदान है।
प्रोफेसर भट्टाचार्य ने कहा, “यह छात्रों को दो अलग-अलग अकादमिक माहौल में रिसर्च पर आधारित पढ़ाई का शानदार मौका देती है। इससे वे ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बना सकेंगे, जो आगे चलकर उनके वैज्ञानिक सफर की दिशा तय करेंगे।”
इस साझेदारी का दायरा शिक्षा से आगे भी जाता है। अगले महीने यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और आईसर तिरुपति मिलकर “फ्रंटियर्स ऑफ साइंस फॉर ग्लोबल एडवांसेज” का आयोजन करेंगे। यह देश भर में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला है, जिसमें जाने-माने शोधकर्ता छात्रों, शिक्षकों और आम लोगों से रूबरू होंगे।
इस लेक्चर सीरीज में बायोटेक्नोलॉजी, जलवायु विज्ञान, क्वांटम टेक्नोलॉजी, इकोसिस्टम, कृषि और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में हो रही ताजा प्रगति को सामने रखा जाएगा।
इस कार्यक्रम में कीनोट भाषण और विशेषज्ञों की पैनल चर्चाएं होंगी, जिनका उद्देश्य अत्याधुनिक विज्ञान के बारे में लोगों की समझ बढ़ाना है। साथ ही, यह कार्यक्रम इस बात पर भी जोर देगा कि आने वाले दशकों की चुनौतियों का सामना करने और नए अवसरों का फायदा उठाने के लिए अलग-अलग विषयों के बीच सहयोग और दुनिया भर की प्रतिभाओं की जरूरत है।

