नई दिल्ली। आने वाले दिनों में हवाई यात्रा करना यात्रियों की जेब पर भारी पड़ सकता है। देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर हवाई किराये में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। कंपनी का कहना है कि विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार इजाफे के कारण किराया बढ़ाना अब अपरिहार्य हो गया है। परिचालन लागत को नियंत्रित करने के लिए कंपनी अपनी उड़ान क्षमता में भी बदलाव करेगी।
इंडिगो ने दिसंबर तिमाही के लिए अपनी क्षमता में सालाना आधार पर एकल अंक के निचले स्तर की वृद्धि का अनुमान जताया है। इसका अर्थ है कि कंपनी फिलहाल उड़ानों के विस्तार को लेकर सतर्क रुख अपनाएगी और लागत प्रबंधन को प्राथमिकता देगी।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसका सीधा असर विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च पर पड़ रहा है। विमानन टरबाइन ईंधन किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से विमानन कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ता है।
कंपनी के सीईओ विली वाल्श ने मीडिया से बातचीत में ईंधन की मौजूदा कीमतों को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा, “मैं इस उद्योग में 47 वर्षों से हूं। मैंने ईंधन की ऐसी ऊंची लागत देखी है, जिसे पहले बहुत अधिक मानता था। लेकिन इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईंधन की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो विमानन कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को यात्रियों तक पहुंचा सकती हैं। ऐसे में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा दोनों के किराये प्रभावित होने की आशंका है।
कुल मिलाकर, महंगे ईंधन और बढ़ती परिचालन लागत ने विमानन उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर आने वाले समय में यात्रियों के यात्रा बजट और एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति, दोनों पर दिखाई दे सकता है।

