लखनऊ। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारायण सेवा संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लाभार्थियों से संवाद और उनके अनुभव जानने के बाद उन्हें कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संस्थान का काम स्वयं बोल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे की मुस्कान छिनने से पूरे परिवार की मुस्कान खो जाती है। नारायण सेवा संस्थान दिव्यांगजनों और उनके परिजनों के चेहरों पर मुस्कान लौटाकर उन्हें नया जीवन देने का सराहनीय कार्य कर रहा है।
पूर्व राष्ट्रपति गोमती नगर स्थित दयाल गेटवे होटल में आयोजित संस्थान के निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं कैलिपर्स फिटमेंट शिविर का शुभारंभ कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने लाभार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और चिकित्सकों से कृत्रिम अंग लगाने की प्रक्रिया की जानकारी ली।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि संस्थान दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर विकसित भारत के संकल्प को मजबूती दे रहा है। उन्होंने प्रदेश में दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए संस्थान को भूखंड या भवन उपलब्ध कराने की घोषणा की।
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन जीने में सक्षम बनाना है।
432 लाभार्थियों को मिला लाभ
शिविर में 432 दिव्यांगजनों को कुल 549 कृत्रिम अंग एवं कैलिपर्स निःशुल्क फिट किए गए। संस्थान की 40 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने फिटमेंट के बाद लाभार्थियों को चलने का अभ्यास कराया। इसके लिए मिरर बार और फिजियोथेरेपी की सहायता ली गई। साथ ही कृत्रिम अंगों के उपयोग और देखभाल की जानकारी दी गई। लाभार्थियों के लिए भोजन की भी निःशुल्क व्यवस्था की गई।
उल्लेखनीय है कि 13 सितंबर को आयोजित चयन एवं माप शिविर में 550 से अधिक दिव्यांगजनों का पंजीकरण हुआ था। इनमें से चयनित 432 लोगों को इस शिविर में कृत्रिम अंग एवं कैलिपर्स लगाए गए। कृत्रिम अंगों के सहारे चलते लाभार्थियों की परेड कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।
इस अवसर पर संस्थान की निदेशक वंदना अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संरक्षक सत्य भूषण जैन ने आभार व्यक्त किया। ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नारायण सेवा संस्थान वर्ष 1985 से दिव्यांगजनों एवं जरूरतमंदों की चिकित्सा, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए कार्यरत है। संस्थान के अनुसार, अब तक 40,809 से अधिक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग और 4.56 लाख से अधिक लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

