बेहद जरूरी हो गया था PFI पर प्रतिबंध, सरकार को मिल रही है वाहवाही

केंद्र सरकार ने PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) और उसके सहयोगियों या मोर्चों को तत्काल प्रभाव से पांच साल की अवधि के लिए एक गैरकानूनी संघ के रूप में घोषित किया। पिछले कुछ दिनों से पीएफआई के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी करके सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है। बता दें कि हाल ही में NIA और तमाम राज्यों की एजेंसियों ने PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 250 से अधिक सदस्यों को हिरासत में लिया था।

मंगलवार को पीएफआई के खिलाफ केंद्र की ओर से दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई की गई थी। पीएफआई से जुड़े 270 लोगों को 7 अलग-अलग राज्यों से हिरासत में लिया गया था। इन लोगों पर आरोप है कि ये संभवत: हिंसा फैलाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे। छापेमारी के दौरान उत्तर प्रदेश से 56 लोगों को गिरफ्तार किय गया, कर्नाटक से 74, असम से 23, दिल्ली से 34, महाराष्ट्र से 47, मध्य प्रदेश से 21, गुजरात से 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 22 सितंबर को भी केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने 106 लोगों को 15 अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया था। इन लोगों पर आरोप है कि देश में आतंकी गतिविधियों के लिए इन लोगों ने समर्थन दिया था। एनआईए पीएफआई से जुड़े 19 मामलों की जांच कर रही है।

पीएफआई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है, जिसका गठन 2006 में हुआ था। इसमे इस्लामिक ग्रुप नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट, मनिथा नीति पसराई और कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी का विलय किया गया था। सूत्रों के अनुसार पीएफआई मुख्य रूप से तीन संस्थाओं को चलाती है, इंडियन फ्रैटर्निटी फोरम, इंडियन सोशल फोरम, रेहाब इंडियन फाउंडेशन।पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों यह संगठन सक्रिय है। देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ है। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इस संगठन की काफी पकड़ बताई जाती है। इसकी कई शाखाएं भी हैं। गठन के बाद से ही पीएफआई पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहते हैं।

PFI बैन पर उ.प्र. के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक  ने कहा कि PFI की असामाजिक गैरकानूनी गतिविधियां लगातार जारी थी। विभिन्न जांच एजेंसियां जांच कर रही थी। जो तथ्य प्रकाश में आए हैं उन्हें देखते हुए गृह मंत्रालय ने जो निर्णय लिया है उसकी पूरे देश ने सराहना की है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी का कहना है कि सरकार ने कट्टरपंथी संगठन PFI पर प्रतिबंध लगाकर अच्छा कदम उठाया है।भारत की सरज़मीं कट्टरपंथी विचारधारा की सरज़मीं नहीं है और न यहां ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा पनप सकती जिससे मुल्क़ की एकता-अखंडता को खतरा हो।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, मैं भारत सरकार द्वारा PFI पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का स्वागत करता हूं। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ है कि भारत के खिलाफ विभाजनकारी या विघटनकारी डिजाइन से सख्ती से निपटा जाएगा।
एनआईए को मिली सूचना के मुताबिक, पिछली कार्रवाई के बाद पीएफआई की पूरे देश में प्रदर्शन व आतंकी वारदात के जरिये कानून व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश थी। खासतौर पर संवेदनशील इलाकों में अशांति फैलाने की तैयारी कर ली गई थी। इसे देखते हुए ऐसे इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। असम व महाराष्ट्र में 25-25 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

PFI बैन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का कहना है कि इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का समय आ गया था। भारत सरकार ने सही फैसला लिया है। यह सभी राष्ट्र विरोधी समूहों के लिए एक संदेश है। मैं लोगों से ऐसे संगठनों से नहीं जुड़ने का आग्रह करता हूं।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह  ने कहा कि राजस्थान में भी जिस प्रकार कई ज़िलों में दंगा हुआ, उसी समय हम कह रहे थे कि PFI का इसमें हाथ था। यहां पर भी जब सिद्धारमैया कि सरकार था उस समय भी 23 से अधिक लोगों की हत्या हुई थी। देश को अखंड रखने के लिए इसपर(PFI) बैन जरूरी था।
पीएफआई ने कहा, हमें निशाना बनाने की केंद्र सरकार की कार्रवाई के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध को रोकने का यह प्रयासभर है और इस निरंकुश सत्ता में ऐसा होना स्वाभाविक ही है। दिल्ली में पुलिस की विशेष शाखा ने कार्रवाई की कमान संभाली। कार्रवाई के विरोध में किसी तरह की हिंसा को रोकने और शांति कायम रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को तैनात किया गया था। शाहीन बाग और जामिया नगर जैसे इलाकों में धारा 144 लागू की गई है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, कई स्थानों पर छापे मारे हैं जिनमें शाहीन बाग और निजामुद्दीन भी शामिल हैं। अब तक 30 लोग हिरासत में लिए हैं। उन्होंने बताया, जांच जारी है। केस नहीं दर्ज किया है।

 

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