Business News : मोपा ने वित मंत्री से तिलहन पर स्टॉक सीमा हटाने, वायदा कारोबार की अनुमति देने का आग्रह किया

नई दिल्ली। मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मोपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर उनसे तेल, तिलहन पर वर्तमान में लागू स्टॉक सीमा हटाने और वायदा बाजार को फिर शुरू करने की मांग की। इनमें मोपा के अनिल चतर के साथ सुरेश नागपाल और हेमंत गोयल भी शामिल थे।प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें ध्यान दिलाया कि पिछले 3 वर्षों से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों को खाद्य तेल तिलहन मार्केट को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिक उत्पादन करने का अनुरोध किया था। उनकी अपील पर देश के किसानों ने बड़े पैमाने पर सरसों सहित अन्य तिलहन का उत्पादन भी किया, जिसके कारण भारत के खाद्य तेलों का आयात 150 लाख टन से 135 लाख टन पर आ गया। इससे हम आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़े।

मोपा के संयुक्त सचिव श्री अनिल चतर ने उन्हें बताया कि खाद्य तेलों के भाव 4 महीने में 40 से 45 फीसदी घटकर कोरोना महामारी के पहले स्तर पर पहुंच गया। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को अब सस्ते भाव पर खाद्य तेल उपलब्ध हो रहा है। मगर किसानों को यदि तिलहन का उचित भाव नहीं मिलता है तो ऐसे में फिर कहीं आयात की नौबत ना आ जाए। इससे हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का तिलहन के क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के सपने की मुहिम को धक्का लगेगा।

उल्लेखनीय है कि पूरे विश्व में सभी कृषि जिंसों में वायदा कारोबार किसी भी विपरीत परिस्थिति में चालू रहता है। उस पर प्रतिबंध नहीं रहता क्योंकि विश्व में किसान एवं उपभोक्ता के बीच प्राइस बेस का उचित रूप से समन्वय रहता है। उन्होंने कहा कि वायदा बाजार पर प्रतिबंध लगने के कारण इसका विपरीत प्रभाव किसानों एवं उपभोक्ताओं पर पड़ा है। वह असमंजस की स्थिति में रहता है कि उसका माल किस भाव पर बिकेगा और उपभोक्ताओं को यह पता नहीं लगता उसे किस भाव पर माल खरीदना पड़ेगा।

 

आज तेल तिलहन पर स्टॉक सीमा की वजह से उद्योग एवं व्यापार जगत डरा हुआ सा है। कई उद्योग बंद पड़ने लगे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि भारतीय वायदा व्यापार में खाद्य तेल, तिलहन को प्रतिबंधित नहीं किया जाए। इससे विदेशी बाजारों में तेजी आएगी जिससे हमारा भारतीय बाजार प्रभावित प्रभावित होगा। गौरतलब है कि कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से सप्लाई चेन में बाधा आई। केंद्र सरकार ने इस बाबत निरंतर प्रयास भी किए लेकिन परिणाम आशानुरूप नहीं रहे।

इतना ही नहीं, वायदा बाजार पर प्रतिबंध लगने से भारत सरकार के राजस्व में भारी कमी देखने को मिलती है। यदि इस दिशा में समय से उचित कदम नहीं उठाए गए तो तिलहन की पैदावार में कमी की संभावना हो सकती है और इसका सीधा लाभ विदेशी बाजारों को मिल जाएगा। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने इससे पहले सोयाबीन आयल, सोयाबीन सीड, चना, ग्वार, ग्वारगम, अरंडी आदि कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया था किंतु उचित समय पर सरकार ने इसे पुनः बहाल कर दिया, जिसके परिणाम अनुकूल रहे।

श्री चतर ने कहा कि मुद्रास्फीति एवं भाव में बढ़ोतरी से विगत 2 वर्षों से बहुत सारी विदेशी सरकार जूझ रही हैं और उनके यहां पर रेगुलेटरी संस्थाओं ने विभिन्न प्रकार के कदम उठाए जैसे कि आयात- निर्यात पर रोक, व्यापार शुल्क लगाना आदि। लेकिन किसी ने भी वायदा बाजार पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि तेल और तिलहन के स्टॉक सीमा फरवरी 2022 में कुछ महीनों के लिए लगाई गई थी और बाद में इसे दिसंबर 2022 तक बढ़ा दिया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि किसानों उपभोक्ताओं एवं उद्योग जगत के हित में तिलहन के उत्पादन बढ़ाने में सरकार को इसके स्टॉक सीमा को तुरंत खत्म करना चाहिए। तेल, तिलहन यानी सरसों, सोयाबीन सोया तेल और क्रूड पाम तेल के वायदा बाजार को चालू कर देना चाहिए। इससे किसानों और उपभोक्ताओं समेत उद्योग जगत को राहत मिलेगी और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।

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