प्रमुख सुर्खियाँ :

कैदियों संग उपवास रख गीता के लिए छठ की व्यवस्था की थी शिबू ने

अनुज कुमार सिन्हा

घटना : धनबाद जेल, 1976
छठ बड़ा पर्व. खास कर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में. अब तो दिल्ली और महाराष्ट्र में भी छठ का बड़ा और भव्य आयोजन होता है. पूरी व्यवस्था होती है. यहां तक कि जेलों में बंद अगर कोई कैदी-विचाराधीन कैदी छठ करना चाहती है तो अधिकांश जेलों में यह सुविधा मिल ही जाती है. 40-45 साल पहले जेलों में यह सुविधा नहीं के बराबर थी.
इसके बावजूद धनबाद जेल में बंद एक बिहारी महिला कैदी-विचाराधीन कैदी की इच्छा को पूरा करने के लिए जेल में छठ कराने की व्यवस्था करायी गयी थी. घटना 1976 यानी आज से 41 साल पहले की धनबाद जेल की है. महिला कैदी थी गीता और व्यवस्था करानेवाले थे शिबू सोरेन. तब वे उसी जेल में बंद थे.
1975 में धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त केबी सक्सेना ने शिबू सोरेन को सरेंडर कर मुख्यधारा में लाने के लिए तैयार कर लिया था.
सक्सेना शिबू सोरेन के कामों से प्रभावित थे. इसी बीच उनका तबादला हो गया था. नये उपायुक्त थे लक्षमण शुक्ला. उन्होंने सक्सेना के काम को आगे बढ़ाते हुए शिबू सोरेन को सरेंडर करवाया था. इसमें बर्नाड किचिंग्या नामक पुलिस अफसर की खास भूमिका थी. उन दिनों शिबू सोरेन का ठिकाना टुंडी का इलाका (खास कर पारसनाथ की पहाड़ी की तराई में बसा गांव पलमा) हुआ करता था. सरेंडर करने के बाद शिबू सोरेन और उनके साथी झगड़ू पंडित को धनबाद जेल में रखा गया था. उपायुक्त लक्षमण शुक्ला खुद इसका ख्याल रखते थे कि जेल में शिबू सोरेन को खाने, रहने में कोई दिक्कत नहीं हो.
नयी चौकी खरीदी गयी थी. नये कंबल लाये गये थे. जेल में जब पहले दिन पानी वाला दूध मिला था, तो उन्होंने शिकायत की. इसके बाद उपायुक्त के घर से हर दिन डेढ़ किलो दूध शिबू सोरेन के लिए जेल भेजा जाता था. जेल में शिबू सोरेन के साथ उन दिनों झगड़ू पंडित भी बंद थे. उन्होंने कुछ साल पहले जेल की कई घटनाओं का जिक्र किया था. उन्होंने छठ से जुड़ी एक घटना बतायी थी. छठ का पर्व नजदीक था.
देश में आपातकाल लगा था. जेल में बंद एक महिला पूरी श्रद्धा के साथ छठ का गीत गा रही थी. शिबू सोरेन समझ नहीं सके थे कि वह महिला क्या गा रही है. तब शिबू सोरेन युवा थे और उनकी उम्र लगभग 34 साल की थी. शिबू सोरेन पर उस गीत का असर पड़ा था. उन्हें लगा था कि महिला तकलीफ में है. उन्होंने झगड़ू पंडित से पूछा-कौन है यह महिला और यह क्या गा रही है. झगड़ू ने समझाया था कि इस महिला का नाम गीता है. बिहारी महिला है. पुलिस ने किसी मामले में पकड़ कर इसे जेल में बंद कर दिया है. वह छठ किया करती थी लेकिन जेल में बंद होने के कारण वह छठ नहीं कर पा रही है. इसका उसे दुख है.
वह लाचार है, कुछ कर नहीं पा रही है. वह गीत गा कर छठ मइया को याद कर रही है. उसकी इच्छा छठ करने की है, लेकिन कर नहीं पा रही है.
यह बात सुन कर शिबू सोरेन ने कहा-गीता छठ करेगी और जरूर करेगी. व्यवस्था हमलोग करेंगे. जेल प्रशासन व्यवस्था करे या नहीं, हम सब मिल कर उसके लिए व्यवस्था करेंगे.
झगड़ू पंडित ने बताया था कि शिबू सोरेन ने बाकी कैदियों-विचाराधीन कैदियों से इस संबंध में बात की. सभी तैयार थे कि गीता को छठ करने के लिए जो भी सामान चाहिए, सब आयेगा. सभी कैदियों ने एक प्रस्ताव जेल प्रशासन को दिया कि वे सभी एक दिन का उपवास रखेंगे और जो पैसा बचेगा, उससे प्रशासन छठ की व्यवस्था करे. सभी कैदियों ने तब गीता के लिए एक दिन का उपवास भी रखा था.
तब जेल प्रशासन भी शिबू सोरेन की बात को मानता था. उन्होंने जेल के अधिकारियों से बात की. जेल के अधिकारियों ने पूरा सहयोग किया. कैदियों ने सहयोग किया और जेल में एक गड्ढा खोद कर उसमें पानी भर कर अर्ध्य देने की व्यवस्था करायी गयी. इस प्रकार गीता ने जेल में छठ किया था. 41 साल बाद जब इस संदर्भ में शिबू सोरेन से बात की गयी और पूछा गया तो उन्होंने कहा-हां, जेल में हमलोगों ने एक दिन का उपवास रह कर छठ के लिए पैसा बचाया था. लेकिन उस महिला का नाम तो याद नहीं आ रहा. बहुत दिन हो गया.
आंदोलन का दौर था. हम जंगल में ही रहते थे. सरेंडर के बाद जेल में बंद थे. वहां जब सुना कि एक महिला छठ करना चाहती है और नहीं कर पा रही है तो मुझसे रहा नहीं गया. मैंने कैदियों से बात की, जेल के अफसरों से बात की और छठ का सारा समान मंगवाया था.
वे कहते हैं-तब जेल में, जिला प्रशासन में ऐसे लोग थे जो अच्छे काम में साथ देते थे. लक्षमण बाबू (तत्कालीन उपायुक्त) अच्छे व्यक्ति थे, समझदार थे और अच्छा काम करते थे. इतना संपर्क रहते हुए अगर हम जेल में एक महिला को छठ करा नहीं पाते तो खुद को माफ नहीं कर पाते. इसी कारण हम सब ने मिल कर छठ पर्व जेल में कराने की व्यवस्था करायी थी. उस समय मुझे बहुत सुकून मिला था.

साभार: प्रभात खबर

सुभाष चन्द्र

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account