परमात्मा का दूसरा रूप है पिता : प्रणब कुमार

नई दिल्ली। लोकजनशक्ति पार्टी के नेता प्रणब कुमार कहते हैं कि इस संसार में परमात्मा का दूसरा रूप पिता ही होते हैं। उन्होंने कहा कि सपने तो मेरे थे, लेकिनउन्हें पूरा करने का रास्ता कोई और बताए जा रहा था। मैंने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और आज सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं। वो कोई और नहीं, बल्कि हमारे पिता थे। जिन्होंने मुझे पाला, पोसा और आज इस लायक बनाया कि मैं लोगों के सुख-दुख में उनका भागीदार बन सकूं।

लोकजनशक्ति पार्टी के केंद्रीय कार्यालय के सचिव प्रणब कुमार कहते हैं कि मेरे पिता मेरे लिए आदर्श है। क्योंकि वे एक आदर्श पिता हैं। उनमें वे सारी योग्यताएं मौजूद हैं जो एक श्रेष्ठ पिता में होती हैं। वे मेरे लिए केवल एक पिता ही नहीं बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी हैं, जो समय-समय पर मुझे अच्छी और बुरी बातों का आभास कराकर आगाह करते हैं। पिताजी मुझे हार न मानने और हमेशा आगे बढ़ने की सीख देते हुए मेरा हौसला बढ़ाते हैं। पिता से अच्छा मार्गदर्शक कोई हो ही नहीं सकता। हर बच्चा अपने पिता से ही सारे गुण सीखता है जो उसे जीवन भर परिस्थितियों के अनुसार ढलने के काम आते हैं। उनके पास सदैव हमें देने के लिए ज्ञान का अमूल्य भंडार होता है, जो कभी खत्म नहीं होता।

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