हंगामा है क्यों बरपा , टिकट ही तो बांटी हैं ,,,

 

नई दिल्ली / टीम डिजिटल। सभो लोग नवरात्र का इंतजार कर रहे थे कि नवरात्र आएं और शुभ मुहूर्त में टिकटें एनाउंस करें और लो भाजपा ने नब्बे में से अठहतर टिकटों की कल घोषणा कर दी । अब घोषणा होते ही हंगामा हो गया । हंगामा है क्यों बरपा ? टिकटें ही तो बांटी हैं ।खिलाडियों को तरजीह दी गयी ।

बबिता फौगाट , योगेश्वर शर्मा और तीर्थ राणा की झोली में टिकट आ गिरे जबकि पैरा एथलीट दीपा मलिक तरसती रह गयीं इस बार भी । खाली हाथ । न लोकसभा चुनाव में टिकट मिली और न ही विधानसभा चुनाव में और ऊपर से नौकरी छोड बैठीं । क्या यह न्यायोचित है ? क्या यह पैरा एथलीट से मजाक नहीं ?

दूसरी ओर अभी तक एक अच्छा कदम उठाया है परिवारवाद के खिलाफ । राव इंद्रजीत की बेटी और कृष्णपाल गुर्जर के बेटे को टिकट नहीं दी । साफ कह दिया कि किसी के बेटे बेटी को टिकट नहीं मिलेगा । पर यह परिवेरवाद चौ वीरेंद्र के परिवार पर लागू क्यों नहीं हुआ ? यही इन नेताओं में रोष है यानी कहीं तो भाजपा ने कमजोरी दिखाई है । इसलिए पूरा श्रेय नहीं दिया जा सकता । दो मंत्री भी टीकट से वंचित कर दिए गये ।

सबसे मजेदार हालत तो कांग्रेस से भाजपा में गयीं शारदा राठौर और कैलाशो सैनी की बनी जिन्हें इस सूची से तो बाहर रखा गया है । यह भी बहुत बडा सबक होगा यदि इन दोनों देवियों को टिकट नहीं मिला आखिरी सूची तक । फिर कहां जायेंगीं ? दलबदल पर भी कदम उठाये भाजपा हौंसला करके । ज्यादातर इधर उधर की पार्टियों से उधार प्रत्याशियों के सहारे पचहतर पार का नारा देने वाली भाजपा का हश्र टिकटों के आबंटन से ही सामने आने लगा है । पृथला के बसपा विधायक टेकचंद के साथ भी विश्वासघात हुआ ।

भाजपा को समर्थन देते बसपा से निष्कासित टेकचंद भो टिकट से वंचित रह गये । सही सजा है यह । ब्रेवो भाजपा ।षहांसी में भी छत्रपाल टिकट से वंचित और विनोद भ्याणा बाजी मार ले गये । अब क्या करेंगे छत्रपाल ?  सैल्यूट। अभी कांग्रेस की लिस्ट आयेगी और बडी पक्की बात है कि भगदड मचेगी । वहां भी । बहुत लोग आखिरी समय में हर टुनाव में पार्टियां बदलते हैं । आते ही वरिष्ठ भी हो जाते हैं और टिकट भी ले उडते हैं । कार्यकर्त्ता कहां जाएं ?


कमलेश भारतीय, वरिष्ठ  पत्रकार 

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