कारगिल युद्ध : जरा याद उन्हें भी कर लो


नई दिल्ली / टीम डिजिटल। 
आज कारगिल युद्ध को बीस वर्ष बीत गये । दो दशक । एक लम्बा समय लेकिन जिन परिवारों ने अपने जवान इसमें खो दिए उनके लिए आज की ही बात है ।देश को नयी पीढी को याद दिलाने के लिए कारगिल विजय दिवस मनाना पड रहा है जबकि ये शहीदों के परिवार कभी इसे भूल नहीं पाएंगे । पाकिस्तान ने ऊंची चोटी से युद्ध शुरू किया जिससे कि आसानी से जीत मिल सके लेकिन भारतीय जवानों का जज्बा कि जीत हमारी ही हुई और पाकिस्तान को मुंह की खानी पडी ।
आज बीस साल बाद युवाओं में जोश भरने और शहीद परिवारों को सम्मानित करने के लिए समारोह आयोजित किए गये । हिसार के गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में आयोजित ऐसे ही समारोह में प्रदेश के 54 शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया । कुल 74 जवान शहीद हुए थे हरियाणा जैसे छोटे से प्रदेश के । हरियाणा में देश की आबादी दो प्रतिशत ही है लेकिन शहीदी में प्रतिशत बारह प्रतिशत रहा । यह किसी भी प्रदेश के लिए गर्व की बात है । कारगिल युद्ध में शहीद अपने जिले के कुछ जवानों के गांवों में एक पत्रकार की जिम्मेदारी निभाते जाना हुआ था । तिरंगे में लिपटे आए पार्थिव शरीरों के लिए सारा गांव ही नहीं आसपास के गांवों के लिए उमड पडा था । बेशक परिवारजनों की आंखें नम थीं लेकिन जज्बा कम नहीं था । आने वाली पीढी को भी सेना में भेजने की कसमें ली जा रही थीं ।
आज बीस साल बाद भी ये सैनिक यह।संदेश दे रहे हैं कि धर्म , जाति और किसी जाति पाति से ऊपर उठकर देश के लिए कुर्बानी दें और यह न कहो कि देश ने हमें क्या दिया , यह कहो कि हमने देश को क्या दिया ? जिस दिन यह भावना घर कर जाएगी उस दिन देश पर मंडराने वाले हर खतरे से हम टकरा सकेंगे ।
जयहिंद ।
 कमलेश भारतीय, वरिष्ठ  पत्रकार  

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