कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banarjee) ने इस्तीफे की अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी नैतिक रूप से चुनाव जीती है और उनके इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी हारी नहीं है, बल्कि परिस्थितियां उनके खिलाफ बनाई गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर मजबूती से वापसी करेगी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने के नाम पर राज्य में अत्याचार किया गया और ऐसा माहौल बनाया गया, जैसा उन्होंने वर्ष 2004 के बाद कभी नहीं देखा।
ममता बनर्जी ने कहा, “यह बेहद भयावह स्थिति थी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान जिस तरह का दबाव और हस्तक्षेप देखने को मिला, वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।”
उन्होंने भवानीपुर स्थित मतगणना केंद्र में अपने साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों को भी दोहराया। ममता ने दावा किया कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें पेट तथा पीठ पर लात मारी गई।
तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई केवल भाजपा से नहीं, बल्कि भारतीय चुनाव आयोग से भी है। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है, हालांकि फिलहाल रणनीति सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, “हम कार्रवाई करेंगे और पलटवार भी करेंगे, लेकिन हमारी रणनीति गोपनीय रहेगी। उचित समय आने पर सब कुछ सामने आएगा।”
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ तृणमूल कार्यकर्ता भय और दबाव के कारण भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यदि भाजपा उनके कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों को लगातार धमकाया और डराया जा रहा है। ममता ने कहा कि राजनीतिक दबाव के इस दौर में यदि कार्यकर्ता अपनी सुरक्षा के लिए कोई फैसला लेते हैं तो वह उसे समझ सकती हैं।
ममता बनर्जी के इन बयानों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया सियासी घमासान शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। चुनावी हार के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष की भूमिका में आक्रामक तेवर अपनाएगी और अपनी राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की कोशिश करेगी।

