नोएडा: दिल्ली से सटे औद्योगिक केंद्र नोएडा के फेज-2 क्षेत्र में सोमवार को मज़दूरों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़पों में बदल गया। नोएडा फेज़ 2 में कंपनी के पास के इलाके में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों का विरोध हिंसक हो गया। प्रदर्शन के दौरान गाड़ियों और प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया गया और पत्थरबाज़ी भी हुई। यहां भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। Noida Special Economic Zone (NSEZ) और होज़री कॉम्प्लेक्स के हज़ारों मज़दूर “व्यवस्थागत शोषण” के आरोपों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हिंसा तक
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन की शुरुआत बेहतर वेतन और काम की शर्तों को लेकर शांतिपूर्ण धरने से हुई थी। लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी और निजी वाहनों व फैक्ट्रियों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस की भारी तैनाती की गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएसी (PAC) की टुकड़ियां भी मौके पर तैनात की गई हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने की ये अपील
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “नोएडा में आंदोलन करने वाले सभी लोगों से मैं अपील करूंगा कि वे प्रदेश में शांति के लिए ऐसा कोई कदम ना उठाएं जिससे कानून व्यवस्था में कोई बाधा पैदा होती है। प्रदेश ने विकास की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं। MSME, उद्योग, रोजगार की बात हो, हर दिशा में प्रदेश आगे बढ़ा है। मैं आंदोलनकारी लोगों से कहूंगा कि किसी के बहकावे में ना आएं। सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में आगे बढ़ेगी।”
क्यों भड़का मज़दूरों का गुस्सा?
इस पूरे विवाद की जड़ में लंबे समय से चला आ रहा वेतन असंतोष और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर नाराज़गी है।
मज़दूरों का कहना है कि वे रोज़ाना 10 से 12 घंटे तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें केवल 12,000 से 15,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। इसके अलावा ओवरटाइम का उचित भुगतान न मिलने और श्रम कानूनों के पालन में लापरवाही के आरोपों ने भी आक्रोश को बढ़ाया है।
मज़दूरों की मुख्य मांगें
- वेतन में वृद्धि: महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन में तत्काल बढ़ोतरी की जाए।
- ओवरटाइम का दोगुना भुगतान: अतिरिक्त काम के लिए कानून के अनुसार डबल वेतन दिया जाए।
- 8 घंटे की शिफ्ट लागू हो: 10–12 घंटे की अनिवार्य ड्यूटी खत्म कर 8 घंटे का कार्यदिवस सुनिश्चित किया जाए।
- समय पर वेतन और पर्ची: नियमित वेतन भुगतान और सैलरी स्लिप दी जाए।
- अन्य सुविधाएं: बोनस, साप्ताहिक अवकाश और शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal Cell) की व्यवस्था की जाए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मज़दूर प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है, ताकि हालात को सामान्य किया जा सके।
हालांकि, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में अभी भी तनाव बना हुआ है और कई फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हुआ है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक ओर औद्योगिक शांति बनाए रखे और दूसरी ओर मज़दूरों के अधिकारों को भी सुनिश्चित करे।
यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम स्थितियों और वेतन ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनका समाधान निकालना अब बेहद जरूरी हो गया है।

