‘बागी’ नहीं, बस अपनी बात रखने वाली पीढ़ी: ईशान धवन बोले, ‘ये फितूर तेरा’ आज की युवा पीढ़ी की आवाज़ को पहचान देता है

मुंबई: पिछले कुछ हफ्तों में एक बात स्पष्ट नज़र आई है कि जेन ज़ी अब चुप रहने वाली पीढ़ी नहीं है। चाहे कॉलेज कैंपस हों, सोशल मीडिया हो या फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी, आज के युवा खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, सवाल पूछ रहे हैं, पुरानी सोच को चुनौती दे रहे हैं और किसी तय दायरे में बंधकर जीना नहीं चाहते। लेकिन, इसके साथ ही उन्हें अक्सर ‘बागी’, ‘बहुत ज़्यादा भावुक’, ‘बहुत राय रखने वाले’ या ‘बहुत अधीर’ जैसे नाम भी दे दिए जाते हैं।
स्टार प्लस का ‘ये फितूर तेरा’ इसी सोच को सामने लाता है। जब समाज आपको समझने से पहले ही आपके बारे में राय बना ले, तब क्या होता है? ऐसे समय में, जब जेन ज़ी अपनी पहचान और अपनी आवाज़ को किसी एक नाम या सोच तक सीमित नहीं रहने देना चाहती, यह शो ऐसे किरदारों की कहानी कहता है, जो परफेक्ट नहीं, बल्कि सच्चे, परतदार और अपनी पहचान के साथ जीने वाले हैं। अभिनेता ईशान धवन बताते हैं कि ‘ये फितूर तेरा’ आज के दौर में क्यों इतना मायने रखता है और कैसे जीत का सफर उस पीढ़ी की सोच को प्रदर्शित करता है, जो खुद को जज होने देने से ज़्यादा समझे जाने की उम्मीद रखती है।
ईशान धवन ने कहा, “जीत का किरदार निभाते हुए मुझे एक बात समझ आई कि हम उन लोगों को बहुत जल्दी जज कर देते हैं, जो हमारी नज़र में ‘नॉर्मल’ नहीं होते। यदि कोई अपनी बात खुलकर कहता है, सवाल पूछता है या अलग रास्ता चुनता है, तो उसे समझने से पहले ही ‘बागी’ या ‘मुश्किल’ कह दिया जाता है। मुझे लगता है कि जेन ज़ी के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। यह पीढ़ी अपनी बात कहना चाहती है और चाहती है कि लोग उसे सुनें और यही बात ‘ये फितूर तेरा’ को आज के समय में इतना खास बनाती है। जीत ऐसा इंसान नहीं है, जो लोगों की मंज़ूरी पाने के लिए खुद को बदल ले। वह भावुक है, उसमें कमियाँ हैं, लेकिन वह अपनी राह पर चलता है और यही बात उसे सच्चा बनाती है। मुझे लगता है कि आज के दर्शक ऐसे किरदारों से ज़्यादा जुड़ते हैं, जो परफेक्ट नहीं, बल्कि अपने असली रूप में ईमानदार होते हैं।”

देखिए ‘ये फितूर तेरा’, 5 अगस्त से, हर रात 8:30 बजे, सिर्फ स्टार प्लस पर और कभी भी जियो हॉटस्टार पर।

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