नई दिल्ली। देशभर में गौसॉर्ट तकनीक (स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमेन) से बछियों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो डेयरी क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अक्टूबर 2024 में लॉन्च की गई गौसॉर्ट तकनीक अब पशु प्रजनन के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। इस तकनीक को राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड द्वारा पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग, भारत सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित यह पहल एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज़ द्वारा क्रियान्वित की जा रही है, जिसका उद्देश्य बेहतर नस्ल के पशु तैयार करना, दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना है।
गौसॉर्ट तकनीक का इस्तेमाल अब बड़े स्तर पर शुरू हो चुका है और इसे अलग-अलग राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इस तकनीक से किसानों को अब ज्यादा सटीक और बेहतर प्रजनन सेवाएं मिल रही हैं, जिससे पशुओं की गुणवत्ता सुधर रही है और डेयरी को ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाया जा रहा है।
प्रोजेक्ट गिर वाराणसी के तहत इस तकनीक से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। वर्तमान में इसके माध्यम से लगभग 91 प्रतिशत बछियों का जन्म हुआ है, जो इस तकनीक की सफलता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। इन बछियों के परिपक्व होने पर किसानों का डेयरी व्यवसाय के माध्यम से सशक्तिकरण होगा और उनकी अतिरिक्त आमदनी होगी।
इस संदर्भ में एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि “गौसॉर्ट सिर्फ एक तकनीक नहीं है बल्कि यह भारत के डेयरी क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक सशक्त माध्यम है। यह किफायती तकनीक किसानों को अधिकांश रूप से बछियां देने के साथ उन्हें बेहतर उत्पादन, स्थिर आय और मजबूत पशुधन की ओर ले जा रही है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत इसका विस्तार देशभर में एक नई डेयरी क्रांति का आधार बन रहा है। प्रोजेक्ट गिर वाराणसी के परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि जब आधुनिक तकनीक सही तरीके से गांवों तक पहुंचती है तो वह न केवल उत्पादन बढ़ाती है बल्कि किसानों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव भी लाती है।”
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी गौसॉर्ट तकनीक का असर साफ दिख रहा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़ और शामली में इस तकनीक के प्रयोग से जन्में पशुओं में 91 प्रतिशत बछियां हैं। यह आंकड़ा इस तकनीक विसवशनीयता को मजबूत करता है और यह दिखाता है कि स्वदेशी गौसॉर्ट तकनीक डेयरी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही है।
गौसॉर्ट का उपयोग करने वाले वाराणसी के राजवीर बताते हैं कि – “गौसॉर्ट तकनीक की मदद से मुझे कईं बछियां मिली हैं। पहले हमें नहीं पता होता था कि बछड़ा होगा या बछिया लेकिन अब हमें पता है कि अधिकतर संभावनाएं बछियां की ही हैं। इससे आगे चलकर दूध देने वाले पशु बढ़ेंगे और हमारी आमदनी भी बढ़ेगी। इस तकनीक से हमारे डेयरी के काम में काफी मुनाफा होने लगा है।”

