मिथिलांगन की ग्रीष्मकालीन वार्षिक खेल प्रतियोगिता का सफल आयोजन, प्रतिभागियों ने दिखाया उत्साह और कौशल

नई दिल्ली। बिहार के प्रवासी मैथिली भाषा-भाषियों की सामाजिक, साहित्यिक, कला एवं सांस्कृतिक संस्था मिथिलांगन द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रीष्मकालीन वार्षिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन नई दिल्ली स्थित मिथिलांगन के भव्य सभागार देवेश्वरी भवन में किया गया। प्रतियोगिता में कैरम, शतरंज और लूडो जैसे लोकप्रिय खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें पुरुषों, महिलाओं और बाल प्रतिभागियों सहित कुल 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रसिद्ध शिक्षाविद् स्वर्गीय राधाकृष्ण लाल दास स्मृति ट्रॉफी के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने खेल कौशल और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विशेष रूप से शतरंज प्रतियोगिता में बच्चों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक रोमांचक बना दिया।

पुरुष वर्ग की कैरम प्रतियोगिता में निर्भय कुमार कर्ण विजेता रहे, जबकि शतरंज में दयानंद मिश्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लूडो प्रतियोगिता में नवीन कुमार और प्रेमकांत मिश्रा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में लूडो प्रतियोगिता की विजेता रचना दास रहीं, जबकि कैरम में छवि दास ने बाजी मारी। बाल वर्ग की लूडो प्रतियोगिता में सृष्टि दत्त और प्रेमकांत मिश्रा ने विशेष उपलब्धि हासिल की।

प्रतियोगिता के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने मिथिला के पारंपरिक व्यंजनों—चूड़ा, दही, चीनी, अचार और आम—का आनंद लिया। खेल प्रतियोगिताओं के समापन के बाद आयोजित भव्य समारोह में सभी विजेता प्रतिभागियों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में मिथिलांगन के अध्यक्ष कमलेश कुमार दास ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन में योगदान देने वाले आयोजकों, प्रायोजकों और व्यवस्थापकों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से महिला एवं बाल विकास प्रभारी दीपाली कर्ण के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्षों में महिला और बाल प्रतिभागियों की संख्या और अधिक बढ़ेगी तथा संस्था की गतिविधियां और व्यापक होंगी।

इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य अरविंद चंद्र दास ‘सुबोध’ ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष से मिथिला के पारंपरिक खेल ‘पचीसी’ को भी प्रतियोगिता में शामिल किया जाए, ताकि अधिक से अधिक सदस्य इस वार्षिक आयोजन से जुड़ सकें और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

खेल, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करने वाला यह आयोजन प्रतिभागियों और उपस्थित जनों के लिए यादगार साबित हुआ।

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