मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की पूर्व संध्या पर सुलभ इंटरनेशनल ने आयोजित की नीति संवाद गोष्ठी

नई दिल्ली: मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की पूर्व संध्या पर सुलभ इंटरनेशनल ने “अवेयरनेस टू एक्शन” विषय पर एक महत्वपूर्ण नीति संवाद का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, राजनयिकों और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेकर लैंगिक न्याय, मासिक धर्म गरिमा और पीरियड पॉवर्टी जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मासिक धर्म से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मिथकों, सामाजिक कलंक और चुप्पी को तोड़ना था। साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक विकास की प्राथमिकता बनाने के लिए समावेशी नीतियों और सामुदायिक स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सभा को संबोधित करते हुए सुलभ इंटरनेशनल की वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती आभा कुमार ने मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर खुलकर संवाद स्थापित करना समय की मांग है।

रेलवे बोर्ड की अतिरिक्त सदस्य (राजस्व) श्रीमती छवि झा ने भी चर्चा में भाग लेते हुए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर अपने विचार रखे और समुदाय स्तर पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की वकालत की।

कार्यक्रम की थीम प्रस्तुत करते हुए सुलभ इंटरनेशनल की राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक श्रीमती नीरजा भटनागर ने पीरियड पॉवर्टी से जुड़े चिंताजनक वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि विश्व बैंक (2018) के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में करीब 50 करोड़ महिलाएं और लड़कियां पीरियड पॉवर्टी से प्रभावित हैं।

भारत की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में 35.5 करोड़ से अधिक मासिक धर्म वाली महिलाएं और किशोरियां हैं, जो कुल महिला आबादी का लगभग 54 प्रतिशत हैं। एनएफएचएस-4 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 33.6 करोड़ मासिक धर्म वाली महिलाओं में से केवल 12.1 करोड़ ही सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं, जबकि मासिक धर्म से जुड़ी बाधाओं के कारण लगभग 2.3 करोड़ लड़कियां यौवनावस्था में स्कूल छोड़ देती हैं।

कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार श्रीमती योगिता स्वरूप, ह्यूमैनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री नीरज गेरा, दक्षिण अफ्रीका उच्चायोग के प्रथम सचिव (राजनीतिक) श्री पीटर महाफ्हा तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की उप आयुक्त डॉ. जोया रिजवी सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

सुलभ सैनिटेशन मिशन फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. मोनिका जैन ने “मासिक धर्म—अब वर्जना नहीं” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज में मासिक धर्म को सामान्य चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के अंतर्गत “लेट्स टॉक अबाउट पीरियड्स” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसका संचालन एसआईएसएएसएसएस की सलाहकार डॉ. अरुणिमा चौहान ने किया। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निधि झा ने मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन पर तकनीकी जानकारी साझा की।

कार्यक्रम का समापन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड हाइजीन की अध्यक्ष डॉ. नमिता माथुर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मासिक धर्म समानता और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता को ठोस कार्रवाई में बदलने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।

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