मुंबई/गडचिरोली: महाराष्ट्र के दूरदराज़ और लंबे समय से विकास की चुनौतियों से जूझते गडचिरोली जिले से अब उम्मीद की नई कहानियां सामने आ रही हैं। एमआईएएम चैरिटेबल ट्रस्ट की एक जमीनी पहल ने यहां के आदिवासी युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाज़े खोलने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।
अहेरी उपखंड के तीन युवाओं—दीपाली भाऊराव चुनारकर, वंदना भीमराव आत्रम और तिरुपति मडावी ने मुफ्त कोचिंग और प्रशिक्षण के बाद सरकारी सेवाओं में चयन पाकर यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी सीमा को पार कर सकती है। यह प्रशिक्षण केंद्र सूरजगढ़ इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से संचालित है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर परिवारों से आने वाले इन युवाओं की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा बन रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की पहलें न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ाती हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नई सोच और आत्मविश्वास भी जगाती हैं। गडचिरोली जैसे इलाकों में, जहां संसाधनों की कमी लंबे समय से बाधा रही है, ऐसे प्रयास बदलाव की मजबूत नींव रख रहे हैं।

