Soft landing क्या है ?


सतीश झा

चन्द्रयान-2 के संदर्भ में आपने Soft landing का बहुत नाम सुना होगा। सामान्य भाषा में समझिये तो एक मां अपने छः-सात महीने के बच्चे को जिस तरह गोद से उतार कर बिछावन पर आराम से सुलाती है, यही Soft landing है। या यों कहिये कि बच्चे का गोद से बिछावन तक की आरामदायक यात्रा ही Soft landibg है। यदि कोई मां अपने बच्चे को अपने गोद से बिछावन पर अचानक पटक दे तो बच्चा फिर भी बिछावन पर ही आयेगा, लेकिन यह Soft landing नही कहलायेगा अपितु इसे Crush कहेंगे। चन्द्रयान-2 के साथ यही हुआ और यह Crush हो गया। हालांकि मिशन अभी खत्म नही हुआ है। आप इस तरह से समझिये कि बच्चे को अचानक नीचे पटक दिया है और हो सकता है कि बच्चे को कोई ज्यादा हानि नहीं पहुँचे। वैसे तो इसकी उम्मीद  कम ही है, लेकिन उम्मीद पर तो दुनिया टिकी है तो हम क्यों उम्मीद छोड़े। चुके रात में मै वैज्ञानिकों के टीम के साथ ही बैठकर यह सम्पूर्ण घटनाक्रम देख रहा था, तो उसी समय वरिष्ठ वैज्ञानिक अमिताभ जी ने बताया कि आप पांच प्रतिशत मान सकते है कि प्रज्ञान फिर से जग जाये और नीचे से हमारे लोग उससे सम्पर्क स्थापित कर लें, लेकिन ऐसा यदि होता है तो यह किसी चमत्कार से कम नही होगा। वैसे भी हम भारतीय चमत्कार पर तो विश्वास करते ही है। तो धैर्य रखें और उम्मीद अभी ना छोड़े, कुछ भी हो सकता है। कहा भी गया है:-
इस पथ का उद्देश्य नहीं है
शांत भवन मे टीक रहना,
अपितु पहुंचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं,
तो जनाब अपने वैज्ञानिकों पर भरोसा रखे, एक ना एक दिन हम जरूर कामयाब होंगे।

(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।)

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