नई दिल्ली। न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने आज न्यायालय संख्या 2 में, आइटम 30 – रामाशंकर प्रजापति बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर जनहित याचिका को सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया।
यह याचिका अधिवक्ता रीना एन. सिंह द्वारा दायर की गई है, जिसमें संवैधानिक रूप से संगत सुधार की मांग की गई है कि आरक्षण के लाभ पात्र समुदायों में आय के आधार पर प्राथमिकता से दिए जाएं, ताकि सबसे गरीब लोगों को पहले अवसर मिले। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 को और सुदृढ़ करता है, जिससे समान अवसर सुनिश्चित हो सके, बिना मौजूदा कोटे में किसी बदलाव के।
अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने बहस के दौरान कहा,“न्याय केवल कानून में नहीं है — न्याय इस बात में है कि पहली मदद उसी हाथ तक पहुँचे, जिसे उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”
पीठ ने टिप्पणी की कि इस याचिका का दूरगामी प्रभाव होगा और अधिवक्ता को “काफी विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।”
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि दशकों से आरक्षण लागू होने के बावजूद, सबसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कई बार लाभ से वंचित रह जाता है, जबकि इसका फायदा अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग को मिलता है। आय आधारित प्राथमिकता से यह सुनिश्चित होगा कि मदद की शुरुआत वहीं से हो, जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

