नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय से राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी), उनके विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने की। इस दौरान मानवाधिकार संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समन्वित और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने कहा कि भारत का मानवाधिकार ढांचा अपनी प्रकृति में विशिष्ट है, जहां राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग कई मामलों में समवर्ती क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के मानवाधिकार प्रदर्शन का मूल्यांकन सभी आयोगों के सामूहिक कार्यों के आधार पर होता है, इसलिए मामलों की पुनरावृत्ति रोकने, सूचना साझा करने की प्रणाली को मजबूत करने और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोगों से अपने कार्यों का पूर्ण डिजिटलीकरण करने और एनएचआरसी के एकीकृत एचआरसीनेट पोर्टल से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आयोगों को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत निर्धारित अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर कार्य करना चाहिए, ताकि अनावश्यक विवादों से बचते हुए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।
सम्मेलन में एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी, महासचिव भरत लाल, महानिदेशक श्रीमती अनुपमा नीलेकर चंद्र सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने एनएचआरसी और एसएचआरसी के बीच बेहतर संवाद और समन्वय को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने विशेष रूप से हिरासत में मौत जैसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई और आदेशों के प्रभावी अनुपालन के लिए मजबूत संपर्क व्यवस्था पर बल दिया।
सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने राज्य आयोगों से प्रभावित समुदायों के साथ प्रत्यक्ष संवाद बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विशेष पर्यवेक्षकों और प्रतिवेदकों के बीच बेहतर तालमेल से संस्थागत प्रभावशीलता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कर्नाटक सरकार की उस पहल की सराहना की, जिसमें आम जनता की सुविधा के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग के संपर्क विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए हैं।
महासचिव भरत लाल ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि मानवाधिकार एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसके समाधान के लिए सभी आयोगों और संबंधित संस्थाओं के बीच सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में आयोग को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से 4.28 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन (18 प्रतिशत), माफियाओं द्वारा संगठित शोषण (17.4 प्रतिशत), सेवा संबंधी मामले (6 प्रतिशत), महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन (5.8 प्रतिशत), जेलों की स्थिति (3.5 प्रतिशत) और श्रमिक अधिकारों से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
उन्होंने हिरासत में मौत, आश्रय गृहों में दुर्व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की दयनीय स्थिति, हाथ से मैला ढोने के कारण होने वाली मौतों तथा दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और बेघर व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की।
एनएचआरसी द्वारा विकसित एचआरसीनेट पोर्टल को मानवाधिकार शिकायतों के प्रभावी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। अब तक 23 राज्य मानवाधिकार आयोग इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड और नागालैंड के आयोग अभी इससे नहीं जुड़े हैं। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान इससे जुड़ने के बावजूद पोर्टल के माध्यम से शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाए हैं।
सम्मेलन के दौरान दो सत्रों में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी चुनौतियां साझा कीं और मानवाधिकार तंत्र को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए। इनमें राज्य आयोगों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना, डिजिटल डेटा साझाकरण बढ़ाना, जेलों, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों और आश्रय गृहों का नियमित निरीक्षण, मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता अभियान चलाना और कमजोर वर्गों तक पहुंच सुनिश्चित करना प्रमुख रहा।
विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों ने भी सुझाव दिया कि मानवाधिकार उल्लंघन होने के बाद दंडात्मक कार्रवाई के बजाय निवारक उपायों पर अधिक ध्यान दिया जाए। पुलिस, सुधार गृह कर्मचारियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के नियमित प्रशिक्षण, जेल सुधार, बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय न्याय के मुद्दों पर विशेष पहल करने की आवश्यकता बताई गई।
सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, गोवा और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के मानवाधिकार आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
एनएचआरसी ने उम्मीद जताई कि इस तरह के संवाद और समन्वय से राष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्र अधिक सशक्त होगा तथा मानवाधिकार उल्लंघनों की रोकथाम और त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

