केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इंडिया एसएमई फोरम की एमएसएमई डिजिटल खरीद पर सबसे बड़ी सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की

 

नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य मंत्री तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बुधवार को इंडिया एसएमई फोरम (आईएसएफ) की रिपोर्ट ‘डिजिटल भारत: इंडिया डिजिटल प्रोक्योरमेंट रिपोर्ट 2026’ जारी की। यह रिपोर्ट देश में एमएसएमई क्षेत्र की खरीद प्रणाली और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति पर अब तक के सबसे व्यापक अध्ययनों में से एक है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एमएसएमई खरीद अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार 124.9 लाख करोड़ रुपये है, जो देश के सबसे बड़े व्यावसायिक व्यय क्षेत्रों में से एक है। अध्ययन में विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र के 27,000 से अधिक एमएसएमई को शामिल किया गया।

सर्वेक्षण में शामिल सेवाओं के मूल्यांकन में अमेज़न बिजनेस को मूल्य पारदर्शिता के मामले में सबसे आगे पाया गया। 37.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसे अपनी पहली पसंद बताया। वहीं, आपूर्तिकर्ताओं की गुणवत्ता के मामले में भी 32.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इसे सर्वश्रेष्ठ मंच माना। औद्योगिक खरीद और एम्बेडेड फाइनेंस के क्षेत्र में मोग्लिक्स अग्रणी रहा।

रिपोर्ट जारी करते हुए शोभा करंदलाजे ने कहा कि भारत के एमएसएमई विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल खरीद से एमएसएमई की कार्यक्षमता बढ़ेगी, लागत घटेगी, नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, जिससे वे देश और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

अमेज़न बिजनेस इंडिया के निदेशक मित्रंजन भादुड़ी ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत की एमएसएमई खरीद अर्थव्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पांच में से चार एमएसएमई का मानना है कि डिजिटल खरीद उनके कारोबार की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक खरीद में एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीतिगत ढांचा तैयार किया है। अब आवश्यकता इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और समय-समय पर सुधार की है ताकि खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी, समावेशी और विकासोन्मुख बन सके।

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई हर महीने 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के बीच खरीद पर खर्च करते हैं। इसके बावजूद कुल खरीद का केवल 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही डिजिटल माध्यमों से होता है, जिससे इस क्षेत्र में डिजिटल विस्तार की बड़ी संभावनाएं दिखाई देती हैं।

एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव केशवेंद्र कुमार ने कहा कि यह रिपोर्ट एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित पहलू पर उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि सरकार, डिजिटल मंचों और उद्योग के सहयोग से एक मजबूत डिजिटल खरीद पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में मूल्य अस्थिरता (55.7 प्रतिशत) सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बाद कई आपूर्तिकर्ताओं का प्रबंधन (37.6 प्रतिशत), भुगतान और ऋण संबंधी समस्याएं (35.6 प्रतिशत) तथा एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता का अभाव (33.4 प्रतिशत) प्रमुख चुनौतियां हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 80.4 प्रतिशत एमएसएमई का मानना है कि अगले तीन वर्षों में डिजिटल खरीद उनके कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, 68.7 प्रतिशत एमएसएमई भविष्य में कच्चे माल और 61.3 प्रतिशत मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद ऑनलाइन करना चाहते हैं।

इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि खरीद को लंबे समय तक केवल एक नियमित परिचालन खर्च के रूप में देखा गया, जबकि यह एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि उद्योग, डिजिटल मंचों और नीति-निर्माताओं के संयुक्त प्रयास से एमएसएमई को डिजिटल खरीद प्रणाली अपनाने में तेजी लाई जा सकती है।

प्रमुख निष्कर्ष: भारत की एमएसएमई प्रोक्योरमेंट अर्थव्यवस्था का परिदृश्य

रिपोर्ट में भारत के एमएसएमई क्षेत्र की खरीद (प्रोक्योरमेंट) प्रणाली और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं—

कीमतों में उतार-चढ़ाव (55.7%) एमएसएमई के लिए खरीद प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बाद अनेक आपूर्तिकर्ताओं का प्रबंधन (37.6%), भुगतान और ऋण संबंधी बाधाएं (35.6%) तथा एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता का अभाव (33.4%) प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आए।
डिजिटल प्रोक्योरमेंट समाधान चुनते समय एमएसएमई सबसे अधिक जीएसटी-अनुपालक (GST-compliant) बिलिंग (45.0%), उत्पादों की व्यापक उपलब्धता (43.3%), ऑर्डर देने में आसानी (43.1%) और तेज डिलीवरी (40.3%) को महत्व देते हैं। इसके अलावा, लगभग आधे (49.9%) उद्यम लचीली भुगतान और ऋण (क्रेडिट) सुविधाओं को भी प्राथमिकता देते हैं।
हर पांच में से चार (80.4%) एमएसएमई का मानना है कि अगले तीन वर्षों में डिजिटल प्रोक्योरमेंट उनके व्यवसाय के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भविष्य में ऑनलाइन खरीद के लिए कच्चा माल (68.7%) तथा मशीनरी और उपकरण (61.3%) एमएसएमई की सबसे प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। इससे संकेत मिलता है कि उद्यम अब केवल सामान्य उपभोग की वस्तुओं तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपने मुख्य उत्पादन संसाधनों की खरीद भी डिजिटल माध्यमों से करने के लिए तैयार हैं।

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