जनजातीय क्षेत्रों में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर सरकार का जोर, राज्यों की भूमिका अहम

नई दिल्ली। देश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और विस्तार की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

हालांकि, आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत संचालित विभिन्न गतिविधियों की प्रगति की नियमित निगरानी कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल हो तथा जरूरतमंद क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचें।

नियमित निगरानी और फील्ड विजिट

मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से नियमित अंतराल पर विभिन्न गतिविधियों की कार्यगत और वित्तीय प्रगति की जानकारी ली जाती है। इसके अलावा, आयुष मंत्रालय की केंद्रीय टीमें समय-समय पर राज्यों का दौरा कर योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन का जायजा लेती हैं।

इन फील्ड विजिट के दौरान उन गतिविधियों की प्रगति का भी आकलन किया जाता है, जिनके लिए राज्यों की ओर से खर्च का विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए हैं।

क्षेत्रीय समीक्षा बैठकों से तय होती है आगे की रणनीति

आयुष सेवाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ क्षेत्रीय समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों की अध्यक्षता मंत्री या सचिव स्तर पर की जाती है। इनके माध्यम से योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ आगे की रणनीति पर भी चर्चा की जाती है।

इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वन-टू-वन बैठकें आयोजित कर कार्यगत और वित्तीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाती है।

थर्ड पार्टी मूल्यांकन से योजनाओं की समीक्षा

राष्ट्रीय आयुष मिशन के क्रियान्वयन और प्रगति का मध्य-अवधि मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। इसके लिए नीति आयोग द्वारा थर्ड पार्टी के माध्यम से मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। मूल्यांकन एजेंसियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का अध्ययन करती हैं।

नए आयुष अस्पताल और औषधालय स्थापित करने का प्रावधान

सरकार ने बताया कि कम सुविधा वाले जिलों सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में नए आयुष अस्पताल, औषधालय और वेलनेस सेंटर स्थापित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है। हालांकि, राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से राज्यों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

योजना के अंतर्गत 50, 30 और 10 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना के लिए सहायता दी जा सकती है। इसके अलावा, ऐसे क्षेत्रों में नए आयुष औषधालयों के भवन निर्माण का भी प्रावधान है, जहां फिलहाल आयुष स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है।

राज्यों को वार्षिक कार्य योजना के माध्यम से देना होगा प्रस्ताव

एनएएम के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों को योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य वार्षिक कार्य योजना (SAAP) के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है। प्रस्तावों के आधार पर पात्र गतिविधियों के लिए केंद्र की ओर से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने की चुनौती

देश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे क्षेत्रों में भौगोलिक दूरी, स्वास्थ्य अवसंरचना की उपलब्धता और प्रशिक्षित मानव संसाधन जैसे मुद्दे स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आयुष सेवाओं के लिए अस्पतालों, औषधालयों और वेलनेस सेंटरों का विस्तार स्थानीय आबादी तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार-प्रसार और सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित और उपयोग किए गए फंड का विवरण भी उपलब्ध कराया गया है।

यह जानकारी केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.