त्रिपोलिया गेट से निकली तीज माता की शाही सवारी, जयपुर से अमेरिका तक पहुंचा तीज का रंग

 

 

जयपुर। तीज के लोकगीतों और जयकारों के बीच शनिवार शाम जयपुर में तीज माता की शाही सवारी ने नगर भ्रमण किया। सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार की महिला सदस्यों ने तीज माता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद तीज माता की पालकी शाही लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट पहुंची, जहां जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने तीज माता की आरती की। आरती के बाद तीज माता की सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई तो त्रिपोलिया गेट से छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक जयपुर की ऐतिहासिक गलियां लोकगीतों, वाद्ययंत्रों और जयकारों से गूंज उठीं। छोटी चौपड़ पर तीज माता की सवारी की महाआरती राजस्थान की उपमुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री दिया कुमारी और जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा द्वारा की गयी.

इस बार जयपुर की तीज का रंग परकोटे तक ही सीमित नहीं रहा। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के डिजिटल माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे प्रवासी राजस्थानियों तक भी शाही सवारी का लाइव प्रसारण पहुंचा। जयपुर में भी 13 प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन के जरिए लोगों ने सवारी के लाइव दर्शन किए।

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, तीज माता की शाही सवारी जयपुर की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें आस्था के साथ लोककला, संगीत, शौर्य और राजसी विरासत एक साथ दिखाई देती है। इस बार आयोजन को डिजिटल माध्यम से व्यापक दर्शक वर्ग से जोड़ने का प्रयास किया गया।

लोकगीतों से सजी शाही सवारी

सवारी के आगे बढ़ने के साथ तीज के पारंपरिक लोकगीतों की स्वर लहरियां वातावरण में घुलती रहीं। कच्ची घोड़ी, कालबेलिया, चरी और घूमर, चंग-ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली और बहुरूपिया जैसी लोक विधाओं ने राजस्थान के अलग-अलग अंचलों की सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा।

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 175 लोक कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। घोड़ों और ऊंटों से सजे शाही लवाजमे ने सवारी की राजसी छटा को और भव्य बनाया।

 

पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने की आरती; जनानी ड्योढ़ी में राजपरिवार की महिला सदस्यों ने की पूजा-अर्चना, 175 लोक कलाकारों ने बिखेरा राजस्थान का लोक वैभव

तलवारबाजी से दिखा बेटियों का शौर्य

शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का प्रदर्शन किया। पारंपरिक तीज उत्सव के बीच बालिकाओं का यह प्रदर्शन राजस्थान की वीर परंपरा और महिला शक्ति का प्रतीक बना। आस्था और उत्सव के साथ सवारी में शौर्य का रंग भी दिखाई दिया।

छोटी चौपड़ पर महाआरती, गणगौरी बाजार में पुष्पवर्षा

सवारी छोटी चौपड़ पहुंची, जहां तीज माता की महाआरती हुई। जेल बैंड और आरएसी बैंड की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और आकर्षक बनाया। जयपुर व्यापार महासंघ की ओर से तीज माता पर पुष्पवर्षा की गई। इसके बाद शाही सवारी गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची, जहां कला मेले और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उत्सव को आगे बढ़ाया।

13 जगहों पर एलईडी स्क्रीन, शहरभर में हुए दर्शन

अजमेरी गेट, न्यू गेट, सरावगी मेंशन, मोती डूंगरी, त्रिमूर्ति सर्किल, रामबाग सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, महाराजा कॉलेज, बिरला मंदिर, राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान कॉलेज, ओटीएस चौराहा और जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट पर एलईडी स्क्रीन के जरिए सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। इससे परकोटे से दूर रहने वाले जयपुरवासियों को भी तीज माता के दर्शन और शाही सवारी देखने का अवसर मिला।

अमेरिका में बसे राजस्थानियों तक पहुंचा तीज का उत्सव

राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के माध्यम से उत्तर अमेरिका में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों ने भी जयपुर की तीज सवारी का लाइव प्रसारण देखा। राजस्थान की संस्कृति और विरासत से प्रवासी समुदाय को जोड़ने वाली संस्था के डिजिटल माध्यम से जयपुर की यह परंपरा समुद्र पार तक पहुंची।

पर्यटन विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सवारी की लाइव स्ट्रीमिंग की गई। दिल्ली से आए सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने जयपुर में तीज उत्सव का अनुभव किया और इसकी झलकियां अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए साझा कीं।

आसमान से हुई पुष्पवर्षा

शाही सवारी के दौरान ड्रोन से पुष्पवर्षा भी की गई। सवारी के मार्ग में महल-अटारियों, झरोखों और हवेलियों से तीज माता की पालकी देखने के लिए लोग उमड़े रहे। देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी सवारी देखने की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

शेखावत के अनुसार, तीज जयपुर की ऐसी परंपरा है जो पीढ़ियों से आस्था और लोकजीवन को जोड़ती आई है। इस बार इसके साथ डिजिटल माध्यम जुड़ने से जयपुर की यह सांस्कृतिक विरासत देश के साथ-साथ विदेशों में बसे राजस्थानियों तक भी पहुंची।

लोकगीतों की धुन, शाही लवाजमे की भव्यता और तीज माता के जयकारों के बीच निकली सवारी ने एक बार फिर जयपुर की उस सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया, जिसमें परंपरा समय के साथ चलती है, लेकिन अपना मूल रंग नहीं छोड़ती।

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