वियतजेट और सैटेयर के बीच रणनीतिक समझौता, एविएशन सप्लाई चेन होगी मजबूत

नई दिल्ली। वियतनाम की एयरलाइन वियतजेट और एयरबस की सेवा कंपनी सैटेयर ने विमानन आपूर्ति श्रृंखला, सामग्री प्रबंधन और विमान के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति जताई है। इस समझौते का उद्देश्य वियतजेट के तेजी से बढ़ते विमान बेड़े, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करने के साथ वियतनाम की विमानन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।

इस समझौते का आदान-प्रदान कोपेनहेगन में आयोजित वियतनाम-डेनमार्क बिजनेस फोरम के दौरान हुआ। इस अवसर पर वियतनाम के महासचिव एवं राष्ट्रपति तो लाम, डेनमार्क के राजा फ्रेडरिक X और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दोनों कंपनियों के बीच यह समझौता मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत सैटेयर की वैश्विक विमानन आपूर्ति और सेवा संबंधी विशेषज्ञता को वियतजेट की बढ़ती परिचालन जरूरतों के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

छह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की तैयारी

वियतजेट के बढ़ते एयरबस विमान बेड़े को सहयोग देने वाले मौजूदा इंटीग्रेटेड मटेरियल सर्विसेज (आईएमएस) कार्यक्रम के अनुभव के आधार पर दोनों कंपनियां सामग्री प्रबंधन, डिजिटल तकनीक और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेंगी। इसके लिए एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने की योजना है, जो छह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का आकलन करेगा।

1. इंटीग्रेटेड मटेरियल सर्विसेज का विस्तार: विमान बेड़े और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप सामग्री की उपलब्धता, खरीद, योजना और इन्वेंट्री प्रबंधन को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

2. लॉन्ग थान एविएशन हब का विकास: लॉन्ग थान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानन सामग्री की आपूर्ति, कंसाइनमेंट सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स से जुड़े समाधानों की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

3. विमान के जीवनचक्र और सर्कुलरिटी समाधान: उपयोग योग्य पुराने विमान पुर्जों, कंपोनेंट की मरम्मत एवं अदला-बदली और अतिरिक्त इन्वेंट्री के बेहतर प्रबंधन पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य लागत दक्षता और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता बढ़ाना है।

4. डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल एकीकरण: उन्नत डेटा विश्लेषण, साझा डेटा प्रणालियों और मांग के पूर्वानुमान के जरिए सामग्री की उपलब्धता पर बेहतर निगरानी तथा विमान रखरखाव की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास होगा।

5. परिचालन सहायता में सुधार: विमान के जमीन पर खड़े रहने की स्थिति में त्वरित सहायता, क्षेत्रीय स्तर पर आवश्यक सामग्री का भंडारण और आपातकालीन लॉजिस्टिक्स समन्वय को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।

6. प्रशिक्षण और कौशल विकास: वियतनाम में विमानन आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए तकनीकी ज्ञान, उद्योग संबंधी अनुभव और पेशेवर प्रशिक्षण के आदान-प्रदान की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

परिचालन दक्षता और स्थानीय विशेषज्ञता पर जोर

वियतजेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुयेन थान सोन ने कहा कि एयरलाइन के बेड़े के विकास, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए सक्रिय एवं कुशल आपूर्ति श्रृंखला बेहद जरूरी है। सैटेयर के साथ साझेदारी से एयरबस की वैश्विक विशेषज्ञता और आपूर्ति क्षमताओं का लाभ उठाकर परिचालन तथा रखरखाव की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह सहयोग लॉन्ग थान इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित रणनीतिक बुनियादी ढांचे के विकास की तैयारियों में भी सहायक हो सकता है। इसके साथ ही वियतनाम में स्थानीय तकनीकी विशेषज्ञता और विमानन क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं को विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

वहीं, सैटेयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड स्टोडार्ट ने कहा कि यह एमओयू वियतजेट के साथ कंपनी की बढ़ती साझेदारी में महत्वपूर्ण कदम है। मौजूदा इंटीग्रेटेड मटेरियल सर्विसेज कार्यक्रम के आधार पर दोनों कंपनियां ऐसे समाधान विकसित करने की संभावनाएं तलाशेंगी, जो विस्तार योग्य, टिकाऊ और डेटा आधारित हों तथा वियतजेट की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को समर्थन दें।

भारतीय यात्रियों को भी मिल सकता है लाभ

वियतजेट भारत के दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों से वियतनाम के प्रमुख शहरों हनोई और हो ची मिन्ह सिटी तक हवाई संपर्क उपलब्ध कराती है। इन शहरों के माध्यम से यात्रियों को एशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के अन्य गंतव्यों तक आगे की यात्रा के विकल्प भी मिलते हैं।

ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला और विमान रखरखाव की दक्षता बढ़ाने की दिशा में यह साझेदारी एयरलाइन के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को समर्थन दे सकती है। इससे क्षेत्रीय विमानन सेवाओं की विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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