जयपुर/एकतानगर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को गुजरात के एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित भारत पर्व 2026 में राजस्थान मंडप का अवलोकन किया। इस दौरान पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. पुनीता सिंह ने प्रधानमंत्री को राजस्थान मंडप में प्रदर्शित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन उत्पादों, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के बारे में जानकारी दी।
एकतानगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित भारत पर्व 2026 में राजस्थान मंडप (स्टॉल संख्या 29) को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’, ‘विविधता में एकता’ और ‘वंदे मातरम्’ की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है। इस अवसर पर सचिव व संयुक्त सचिव पर्यटन मंत्रालय भी मौजूद थे।
‘राजस्थान : गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और विकास की जीवंत पहचान’ की संकल्पना पर आधारित यह मंडप प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शिल्पकला और पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।
अतिरिक्त निदेशक डॉ.पुनीता सिंह के अनुसार राजस्थान मंडप में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और पर्यटन अनुभवों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। इनमें डीग पैलेस, गढ़ीसर झील, जयपुर का हवा महल, रणथंभौर टाइगर रिजर्व, शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियां, चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ, जोधपुर की पारंपरिक गलियां, श्रीनाथजी मंदिर, सिलिसेढ़ झील, बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग का अनूप महल और पैलेस ऑन व्हील्स प्रमुख हैं।
मंडप में विरासत पर्यटन, मरुस्थलीय सफारी, वन्यजीव पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। पारंपरिक वस्त्रों, रंग-बिरंगी कठपुतलियों और राजस्थानी कलात्मक वस्तुओं से मंडप को आकर्षक स्वरूप दिया गया है। हस्तशिल्प कारीगरों द्वारा अपने हुनर का सजीव प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे आगंतुकों को प्रदेश की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कारीगरों की दक्षता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।
डॉ. सिंह के अनुसार राजस्थान मंडप में ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत राज्य के विशिष्ट उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया है। इनमें एप्लीक वर्क, लाख शिल्प, कुंदन-मीणाकारी के आभूषण और लकड़ी की नक्काशी सहित विभिन्न पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। इनके माध्यम से राजस्थान की समृद्ध शिल्प परंपरा, स्थानीय उत्पादों और पीढ़ियों से हस्तांतरित होते आ रहे कारीगरों के कौशल को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजस्थान की लोक संस्कृति और संगीत परंपरा मंडप का एक प्रमुख आकर्षण है। यहां पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों और रावणहत्था वादन के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। अतिरिक्त निदेशक डॉ. पुनीता सिंह के अनुसार ये प्रस्तुतियां राजस्थान की लोककलाओं, संगीत और सामाजिक परंपराओं से आगंतुकों को परिचित कराने के साथ भारतीय संस्कृति की विविधता और सांस्कृतिक सद्भाव का संदेश भी दे रही हैं।
अतिरिक्त निदेशक सिंह ने कहा की भारत पर्व 2026 में राजस्थान की सहभागिता प्रदेश की गौरवशाली विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, पर्यटन संभावनाओं और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। राजस्थान मंडप देश की सांस्कृतिक विविधता में प्रदेश के योगदान को रेखांकित करते हुए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना, राष्ट्रीय एकता और आपसी सद्भाव के संदेश को सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है।

