बैतूल में जनजातीय समाज के सशक्तिकरण महासम्मेलन को किया संबोधित, प्राकृतिक जीवनशैली और आध्यात्मिक जागृति पर दिया जोर

बैतूल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि किसी भी समाज का वास्तविक सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, जागरूकता और दायित्वबोध के विकास से होता है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला है तथा शाश्वत विकास वही है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे।

राष्ट्रपति बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। आध्यात्मिक चेतना व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्ति का बोध कराती है और उसे उच्च जीवन मूल्यों से जोड़ती है।

विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़े। उन्होंने कहा कि हिमालय से कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

जनजातीय संस्कृति प्रकृति संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीता आया है। यह समाज धरती, जल, वायु, सूर्य और चंद्रमा सहित प्रकृति के विभिन्न तत्वों को पूजनीय मानता है और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही करता है।

उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की चिंता कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवनशैली मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जनजातीय समुदाय प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है और यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य का रास्ता

महासम्मेलन परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज द्वारा तैयार प्राकृतिक खेती के उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है और अनेक बीमारियां भी बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भारत की पारंपरिक कृषि पद्धति रही है और देश पुनः उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि मन, शरीर और आध्यात्मिक चेतना पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सशक्तिकरण पर बल

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते समय में जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे विकास के अवसरों का लाभ उठा सकें। साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जनजातीय समाज के स्वास्थ्य स्तर में सुधार आएगा।

सेवा और अध्यात्म का संगम समाज को देता है नई दिशा

राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान कई दशकों से आध्यात्मिक जागरण, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संस्था ने हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि जब सेवा और अध्यात्म का संगम होता है, तब समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। यह महासम्मेलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

राज्यपाल ने बताया आध्यात्मिक चेतना को समाज सुधार का माध्यम

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत और संस्कारित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान और मेडिटेशन से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

राष्ट्रपति का जीवन प्रेरणा का स्रोत : दुर्गादास उइके

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष, सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण है।

महासम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कलश एवं ध्वज प्रदान कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान ब्रह्मकुमारी संस्थान की राजयोगिनी मंजू दीदी एवं अन्य पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.