यूपी के लिए बीजेपी का ‘चक्रव्यूह’ तैयार, 2027 में जीत की हैट्रिक की तैयारी

 

सुनील सौरभ
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत का परचम लहराने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पूरे जोश के साथ उत्तर प्रदेश के रण में उतर चुकी है। बंगाल की जीत ने यूपी के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल विजय के बाद अपने पहले संबोधन में ही सीधे तौर पर यूपी चुनाव जीतने का शंखनाद कर दिया। पीएम के इस संबोधन ने साफ कर दिया कि बीजेपी अब रुकने वाली नहीं है और उसका अगला लक्ष्य उत्तर प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाना है। इस बार बीजेपी की रणनीति के केंद्र में ‘आधी आबादी’ यानी महिलाएं हैं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष को घेरने के लिए बीजेपी ने एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जो जातीय समीकरणों के पुराने बंधनों को तोड़कर विकास और सुरक्षा की नई इबारत लिखने को तैयार है। पार्टी ने यूपी को 6 सांगठनिक क्षेत्रों (अवध, कानपुर, गोरखपुर, काशी, ब्रज, और पश्चिम) में विभाजित किया है और सभी क्षेत्रीय टीमों में नए चेहरों को लाने की तैयारी है। चुनाव से करीब 9 महीने पहले, योगी कैबिनेट में 6 नए मंत्री शामिल किए गए और 2 को प्रमोट किया गया, जिससे मंत्रियों की कुल संख्या 60 हो गई है।

इसमें ओबीसी, दलित और ब्राह्मण चेहरों को जगह देकर सामाजिक समीकरणों को मजबूत किया गया है। बीजेपी की सबसे बड़ी रणनीति महिला आरक्षण के जरिए समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाना है। पार्टी का मानना है कि महिलाएं जब एकमुश्त होकर किसी दल का समर्थन करती हैं, तो जातीय समीकरण खुद-ब-खुद ध्वस्त हो जाते हैं। बंगाल में जिस तरह महिलाओं ने बीजेपी पर भरोसा जताया, उसी तर्ज पर यूपी में भी ‘महिला कार्ड’ खेलने की तैयारी है। विपक्ष के पास फिलहाल इस महिला-केंद्रित राजनीति का कोई ठोस तोड़ नजर नहीं आ रहा है। कुल मिलाकर, बीजेपी ने बंगाल के बाद यूपी की सत्ता पर तीसरी बार काबिज होने के लिए अपनी पूरी मशीनरी झोंक दी है और चुनावी बिसात बिछाई जा चुकी है। अब देखना यह है कि विपक्ष इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए क्या रास्ता चुनता है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी खुद चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। वह लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल (2026) में शानदार जीत दर्ज करने के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने अब उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनावों के लिए अपना ‘चक्रव्यूह’ (चुनावी रणनीति) तैयार कर लिया है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर ‘हैट्रिक’ लगाना है।

यूपी बीजेपी के महामंत्री संगठन धर्मपाल, जिन्हें संगठन का असली शिल्पकार माना जाता है, उन्होंने समीक्षा बैठक कर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वह पिछले कुछ दिनों में 20 से ज्यादा जिलों का तूफानी दौरा कर चुके हैं और 200 से अधिक बैठकें कर जमीनी हकीकत का जायजा ले चुके हैं। उनका पूरा ध्यान अब बीजेपी को बूथ स्तर तक इतना मजबूत बनाने पर है कि विपक्ष की कोई भी रणनीति टिक न सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शीघ्र प्रदेश की सभी 1 लाख 62 हजार बूथ समितियों का गठन हर हाल में पूरा कर लिया जाए। पन्ना प्रमुखों और शक्ति केंद्र प्रभारियों के कामकाज की सीधी समीक्षा यह बताती है कि पार्टी इस बार माइक्रो-मैनेजमेंट पर पूरा जोर दे रही है। एक तरफ जहां संगठन के स्तर पर धर्मपाल मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुशासन और ‘आध्यात्मिक राष्ट्रवाद’ के एजेंडे को धार दे रहे हैं। योगी सरकार की विकास योजनाएं और अपराध के खिलाफ उनका सख्त रुख जनता के बीच एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

बीजेपी का मानना है कि विकास के साथ जब राष्ट्रवाद का मेल होता है, तो वह अजेय बन जाता है। पार्टी अब अपने सुशासन के मॉडल को घर-घर तक पहुंचाने के लिए डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर अभियान तेज कर रही है। पन्ना प्रमुखों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा संपर्क बनाए रखें। 2027 के चुनाव में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही बीजेपी का मुख्य चेहरा होंगे, जिन्हें उनके सुशासन और कानून-व्यवस्था के दम पर पेश किया जा रहा है।

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