लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में नाबार्ड की ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से वित्त-पोषित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की हाई पावर कमेटी की प्रथम बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने पिछले वित्तीय वर्ष की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी कार्यदायी विभागों को निर्देश दिया कि पुनःप्राथमीकरण, प्रतिपूर्ति दावों तथा परियोजना पूर्णता प्रमाणपत्र (पीसीआर) समयबद्ध रूप से नाबार्ड को भेजे जाएं। उन्होंने नाबार्ड को अपने डिजिटल समाधान का विभिन्न विभागों के साथ एकीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि डेटा संप्रेषण और परियोजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सके।
मुख्य सचिव ने आरआईडीएफ-32 (2026-27) के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति हेतु नाबार्ड को भेजने पर भी बल दिया। इसके साथ ही, अभी तक शुरू नहीं हुई तथा धीमी गति से संचालित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिपूर्ति दावों के शीघ्र प्रस्तुतीकरण के निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी विभागों एवं नाबार्ड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना विकास की परियोजनाओं को गति मिल सके।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने बैठक को अवगत कराया कि गत वित्तीय वर्ष के दौरान आरआईडीएफ के अंतर्गत विभिन्न विभागों की कुल 2,419 करोड़ रुपये की नई परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जबकि लगभग 3,000 करोड़ रुपये का ऋण विभिन्न कार्यदायी विभागों को वितरित किया गया। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए किया जाएगा।
बैठक में पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश कुमार मेश्राम, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री अजय चौहान, वित्त विभाग की सचिव श्रीमती संदीप कौर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। नाबार्ड, उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से मुख्य महाप्रबंधक श्री पंकज कुमार तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

