12,000 से अधिक पिन-कोड क्षेत्रों के ग्राहकों ने ‘स्टैंड फॉर हैंडमेड’ स्टोरफ्रंट से उत्पाद खरीदा

नई दिल्ली। Amazon.in ने 10 लाख से अधिक कारीगरों और बुनकरों और महिला उद्यमियों की मदद के लिए 10 सप्ताह चलने वाली पहल ‘स्टैंड फॉर हैंडमेड’समाप्ति की घोषणा की। इस पहल ने अमेज़न कारीगर (बुनकरों और कारीगरों के लिए) और अमेज़न सहेली (महिला उद्यमियों के लिए) विक्रेताओं को क्रमशः 3.2 गुना और 2.1 गुना वृद्धि हासिल करने में सक्षम बनाया। 32 विक्रेताओं ने 10 सप्ताह की अवधि में 1 लाख रुपये की बिक्री पार की, जबकि 2 विक्रेताओं की 1 करोड़ रुपये की बिक्री को पार कर लिया। इस पहल के तहत, अमेज़न कारीगर कार्यक्रम के 8 लाख से अधिक कारीगरों और बुनकरों और अमेज़न सहेली कार्यक्रम की2.8 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को 10 हफ्तों के लिए 100% एसओए शुल्क माफी से लाभ मिला है। 200 से अधिक नए विक्रेता कारीगर कार्यक्रम में शामिल हुए और 100% एसओए शुल्क माफी से लाभान्वित हुए, जिसने 35,000 से अधिक कारीगर और बुनकर जीवन को प्रभावित किया।

प्रणव भसीन, डायरेक्टर, एमएसएमई एंड सेलर एक्सपीरियंस, अमेज़न इंडिया ने कहा कि “स्टैंड फॉर हैंडमेड’ इनिशिएटिव कारीगरों, बुनकरों और महिला उद्यमियों सहित छोटे व्यवसायों की मदद करने के हमारे निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है, जो महामारी के कारण होने वाले आर्थिक संकट से अपने व्यवसाय को उबारना चाहते हैं। हम इस पहल को मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि 12,000 से अधिक पिनकोड क्षेत्र के ग्राहकों ने विशेष रूप से क्यूरेट किए गए स्टोर फ्रंट से उत्पाद खरीदा है। फेस्टिव सीजन भी अब आने वाला है, इसलिए हमारा ध्यान अपने विक्रेताओं की मदद करने पर केंद्रित है ताकि वे अपने कारोबार में तेजी लाते हुए प्रगति कर सकें।”

दिल्ली के आर्ट बंकर की पूजा रत्नाकर ने कहा कि “अमेज़न इंडिया के ‘स्टैंड फॉर हैंडमेड’ पहल के माध्यम से, हम बाजार में अपनी दृश्यता बढ़ाने में कामयाब रहे और हमारी बिक्री में 50% की वृद्धि हुई। अमेज़ॅन पर हमारे व्यवसाय के लिए 10 सप्ताह की अवधि बहुत फायदेमंद रही तथा जुलाई और अगस्त का महीना इस साल हमारे सबसे अच्छे महीनों में शामिल रहा! वैश्विक महामारी और अन्य बाधाओं के बावजूद, अमेज़न टीम से निरंतर मिले समर्थन के लिए हम उनके आभारी हैं। हमारा काम चलता रहा, जिसकी वजह से हमारी टीम और हमारे कारीगरों को अपने वेतन और रोजगार को लेकर कोई चिंता नहीं करनी पड़ी।”

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