दरभंगा (बिहार) : दरभंगा में नशा उन्मूलन अभियान को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को जिलाधिकारी Kaushal Kumar की अध्यक्षता में जिला स्तरीय एनसीओआरडी (NCORD) समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में संपन्न हुई, जिसमें समिति के निर्धारित कार्यों एवं नशा उन्मूलन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे, जबकि कुछ सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक के दौरान पूर्व में दिए गए निर्देशों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने पहले ही सहायक औषधि नियंत्रक एवं सभी औषधि निरीक्षकों को दवा दुकानों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। इस क्रम में जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देशित किया कि औषधि निरीक्षकों के लिए तत्काल एक अलग कक्ष उपलब्ध कराया जाए, ताकि जब्त की गई दवाओं को सुरक्षित रखा जा सके।
बैठक में सहायक औषधि नियंत्रक एवं औषधि निरीक्षकों ने शहरी क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर प्रतिबंधित टैबलेट, कफ सिरप और अन्य नशीली दवाओं की पहचान किए जाने की जानकारी जिलाधिकारी को दी।
इस पर जिलाधिकारी ने सभी औषधि निरीक्षकों को आपसी समन्वय के साथ आवश्यकता पड़ने पर मद्यनिषेध विभाग एवं संबंधित थाना पुलिस के सहयोग से संयुक्त छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कई स्थानों पर बिना जीएसटी बिल के दवाओं की बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने औषधि निरीक्षकों को जीएसटी अधिकारियों के साथ संयुक्त जांच एवं छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की रोकथाम को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष सख्ती बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री जोन घोषित कर कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया।
इसके तहत नगर निगम क्षेत्र में सभी औषधि निरीक्षकों तथा अन्य क्षेत्रों में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को शैक्षणिक संस्थानों का सर्वे कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने सभी औषधि निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र में गुप्त सूचनाओं का संकलन करने, आम जनता एवं लाइसेंसधारी दवा दुकानों से प्रतिबंधित टैबलेट, कफ सिरप एवं अन्य नशीले पदार्थों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए।
साथ ही उन्होंने स्वयं क्षेत्र भ्रमण कर दवा दुकानों की औचक जांच करने तथा सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में विद्यार्थियों और युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने डीपीएम जीविका, जिला कल्याण पदाधिकारी एवं जिला पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे जीविका दीदी, टोला सेवक, तालीमी मरकज, विकास मित्र समेत अन्य कर्मियों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएं।
बैठक में बताया गया कि Darbhanga Medical College and Hospital में 10 बेड का नशा मुक्ति केंद्र संचालित है, जहां नशे के आदी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
हालांकि जिले का भौगोलिक क्षेत्र बड़ा होने के कारण दूरदराज के इलाकों से मरीजों को जिला मुख्यालय पहुंचने में कठिनाई होती है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने बिरौल अनुमंडल में एक नया नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर सिविल सर्जन को भेजने का निर्देश दिया।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, सहायक आयुक्त मद्यनिषेध प्रदीप कुमार सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि नशा उन्मूलन केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

