नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र के बीच FCRA संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार दोनों विधेयकों को इसी सत्र में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि, विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
10, 11 और 12 अगस्त को सांसदों की मौजूदगी पर जोर
10, 11 और 12 अगस्त के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों को संसद में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। इससे इन तारीखों के दौरान सदन में महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही होने की संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
FCRA संशोधन पर सरकार की नजर
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार सभी पक्षों से सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित बदलाव का एक प्रमुख पहलू उन संस्थाओं की संपत्तियों से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसी स्थिति में विदेशी अंशदान से अर्जित संपत्तियों के प्रबंधन के लिए सरकारी व्यवस्था किए जाने का प्रावधान चर्चा में है। सरकार का तर्क है कि FCRA के तहत विदेशी धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही और संपत्तियों के उपयोग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।
ईसाई संगठनों और मिजोरम के मुख्यमंत्री से बातचीत
FCRA को लेकर सरकार की ओर से विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। ईसाई संगठनों और मिजोरम के मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद 12 अगस्त को विधेयक संसद में पेश किए जाने की संभावित तारीख के रूप में चर्चा में आया है।
हालांकि, अंतिम विधायी कार्यक्रम और विधेयक की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संसद की आधिकारिक कार्यसूची से होना महत्वपूर्ण होगा।
परिसीमन विधेयक पर भी नजर
FCRA के साथ-साथ परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। सरकार दोनों मुद्दों पर व्यापक चर्चा चाहती है, लेकिन सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर सरकार विधेयकों को पारित कराने के लिए उपलब्ध संसदीय प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकती है।
परिसीमन का विषय राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इसका सीधा संबंध भविष्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है।
अमेरिका की टिप्पणी पर भारत का रुख
FCRA को लेकर विदेशी प्रतिक्रिया के बीच भारत सरकार ने कथित तौर पर स्पष्ट किया है कि विदेशी अंशदान से जुड़े कानून बनाना भारत का आंतरिक और संप्रभु अधिकार है। भारत का रुख रहा है कि देशहित में कानून और नियामक व्यवस्था तय करना भारत का अपना विषय है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
10 से 12 अगस्त पर रहेगी खास नजर
कुल मिलाकर संसद में 10, 11 और 12 अगस्त महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। FCRA संशोधन विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की रणनीति, विपक्ष का रुख और सदन की कार्यवाही आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।
हालांकि, विधेयकों की पेशी, चर्चा और पारित होने की अंतिम स्थिति संसद की आधिकारिक कार्यसूची और सदन की वास्तविक कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।

