प्राज ने बनाए बायोसिरप® से इथेनॉल का उत्पादन पूरे वर्ष भर करना संभव, शक्कर क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा

नई दिल्ली। प्राज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (प्राज) ने गन्ने के रस पर प्रक्रिया करने के लिए एक नवप्रवर्तक समाधान की घोषणा की है। इससे रस का रूपांतरण बायोसिरप (BIOSYRUP®) नामक एक नए शाश्वत फीडस्टॉक में होगा, जिससे इथेनॉल का उत्पादन पूरे वर्ष भर करना संभव हो जाएगा।

प्राज ने गन्ने के रस पर प्रक्रिया करने की नई तकनीक विकसित कर के उसका पेटंट भी लिया है, क्योंकि गन्ने का रस नाशवान तथा मौसमी पदार्थ होता है जिसे सामान्य स्थिति में 24 घंटों से अधिक समय तक भंड़ारित नहीं किया जा सकता। लेकिन चूंकि इस प्रक्रिया से रस का रूपांतरण अनुकूलित बायोसिरप® में किया जाता है, वह 12 महीनों तक स्टोर किया जा सकता है। इस सुविधा का उपयोग कर के शक्कर फैक्ट्रियाँ, गन्ने की ऋतु खत्म होने के बाद भी, इथेनॉल बना सकती हैं जिससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ कर अधिकतम मुनाफा भी कमाया जा सकता है।

प्राज यह पहला संगठन है जिसने इस पेटंटेड् तकनीक का प्रयोग कर के बायोसिरप® बनाया है। 03 दिसंबर 2021 पर, सातारा स्थित ‘मे. जयवंत शुगर्स’ इस फैक्ट्री में इस तकनीक का आरंभ कर के सफल प्रदर्शन भी किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि थे ‘नैशनल फेडरेशन ऑफ कोऔपरैटिव शुगर फैक्ट्रीज’ (NFCSF) के अध्यक्ष और ‘साखर संघ (मुंबई)’ के सभापति श्री. जयप्रकाश दांडेगांवकर। इसमें, अन्य मान्यवरों के साथ, शक्कर क्षेत्र के आयुक्त श्री. शेखर गायकवाड जैसे महत्वपूर्ण अतिथि भी शामिल थे।

माँग और आपूर्ति का मेल न होने के कारण, शक्कर की बहुलता होने की चुनौती पैदा हुई है। पारंपरिक विचार के मुताबिक, शक्कर कारखाने केवल गन्ने के मौसम में इथेनॉल बना सकते हैं। शक्कर का अतिरिक्त उत्पादन टालने हेतु, केंद्र सरकार ने अपनी जैव ईंधन नीति 2018 के अनुसार, गन्ने के रस का उपयोग इथेनॉल बनाने हेतु सीधा करने की अनुमति दी है।

प्राज द्वारा निर्मित, बायोसिरप® से इथेनॉल बनाने की व्यावसायिक सुविधा का अमल मे. जयवंत शुगर्स में सफलतापूर्वक किया गया है। न का भंड़ारण एक वर्ष तक किया गया और 12 महीनों बाद भी शक्कर की मात्रा में कमी (शुगर लॉस) नहीं देखी गई। इस तकनीक को भारत की अग्रणी शक्कर अनुसंधान संस्था, वसंतदादा शुगर इंस्टिट्यूट (VSI) ने मान्यता दी है।

इस अवसर पर शक्कर आयुक्त श्री. शेखर गायकवाड ने कहा, “फिलहाल भारत में शक्कर का अतिरिक्त यानि 6 MMT उत्पादन हुआ है, जिस कारण शक्कर कारखानों की उपयुक्त पूंजी 18 से 24 महीनों तक ठप रहती है। दीर्घावधि दृष्टि में गन्ने के रस का उपयोग इथेनॉल बनाने हेतु करना, यही एक शाश्वत रास्ता शक्कर कारखानों के लिए बचता है। यह अभूतपूर्व तकनीक हासिल करने वाली प्राज की टीम का मैं अभिनंदन करता हूँ। मुझे विश्वास है कि यह तकनीक सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के शक्कर क्षेत्र का रूप बदल देगी।“

प्राज के कार्यकारी सभापति डॉ. प्रमोद चौधरी ने इस वैश्विक आरंभ के संदर्भ में कहा, “बाजारों की प्रतिकूलताओं का सामना करने वेले शक्कर उद्योग के लिए यह एक क्रांतिकारी समाधान है। बायोसिरप तकनीक का उपयोग कर के शक्कर कारखाने अपने संसाधनों का अच्छा इस्तेमाल कर के उन्नत वित्तीय कार्यप्रदर्शन भी कर सकते हैं। अहम् मुद्दा यह है कि इससे इथेनॉल का उत्पादन बढ़ कर 20% EBP का लक्ष्य हासिल होगा। संचालन-तंत्र से मेल रख कर बायोसिरप® तकनीक, राष्ट्रीय स्तर के उत्पादन में तथा ‘इथेनॉल कहीं भी, कहीं भी’ संकल्पना साकार करने में मदद कर रही है। किसानों की तरक्की करने तथा ग्रामीण वित्तव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु प्रगतिशील समाधान विकसित एवं लागू करने में प्राज ने हमेशा गर्व महसूस किया है। इस अगुआई में शक्कर आयुक्त, VSI, साखर संघ मुंबई और मे. जयवंत शुगर्स से मिले निरंतर सहयोग के लिए मैं उनका आभारी हूँ। दुनियाभर के हमारे ग्राहकों ने इस तकनीक में काफी रुचि दर्शाई है।“

पिछले सप्ताह में हुए आरंभ के बाद, बायोसिरप® ने केवल शक्कर उद्योग का ही नहीं बल्कि शक्कर से सीधे संबंधित न होने वाले अन्य राज्यों का भी ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि इसे भारतीय इथेनॉल उद्योग की प्रगति का एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

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