नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है। इसके साथ ही देशभर में वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत हो गई है। हालांकि इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि की तुलना में तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने आगामी सात दिनों के दौरान केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून के सक्रिय होने के साथ देश के 24 राज्यों में बारिश, तेज हवाओं, गरज-चमक और आंधी-तूफान को लेकर विभिन्न स्तर के अलर्ट जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों तथा पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच सकता है।
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून एक जून के आसपास केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री 3 जून के बाद हुई है। सामान्यतः मानसून को पूरे देश में फैलने में लगभग डेढ़ महीने का समय लगता है। इसके बाद सितंबर के मध्य से राजस्थान के रास्ते इसकी वापसी शुरू होती है और अक्टूबर के मध्य तक मानसून पूरी तरह देश से विदा हो जाता है।
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में यह सातवीं बार है जब मानसून निर्धारित समय से देर से केरल पहुंचा है। मौसम विभाग के दीर्घकालिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मानसून के आगमन की तिथि हर वर्ष अलग-अलग रही है। वर्ष 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंचा था, जबकि वर्ष 1972 में सबसे अधिक देरी से 18 जून को इसकी एंट्री दर्ज की गई थी।
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसानों के लिए मानसून का आगमन राहत लेकर आया है, क्योंकि इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है तो देश के अधिकांश हिस्सों में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और जलाशयों में भी पर्याप्त जल संचय होने की संभावना है।

