ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को यह उपलब्धि हासिल की। मंत्रिमंडल ने देश के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई।
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला। उनका तीसरा लगातार प्रधानमंत्री कार्यकाल 9 जून 2024 को शुरू हुआ। मंत्रिमंडल ने कहा कि यह उनकी नेतृत्व क्षमता में जनता के निरंतर विश्वास को दर्शाता है।
मंत्रिमंडल के अनुसार, जमीनी स्तर पर कार्य करने से लेकर राज्य और देश का नेतृत्व करने तक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण निरंतर बना रहा। ‘सेवा ही समर्पण’ के सिद्धांत और स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ बताने की भावना के साथ उन्होंने जनसेवा को शासन के केंद्र में रखा। उनका कार्य दर्शन ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र से प्रेरित रहा है।
अनुच्छेद 370, भारतीय न्याय संहिता और जीएसटी सुधारों का उल्लेख
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कल्याणकारी योजनाओं, आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और भारतीय विरासत के क्षेत्र में हुए बदलावों को रेखांकित किया। इसमें अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू करने, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत और अगली पीढ़ी के जीएसटी 2.0 सुधारों का उल्लेख किया गया।
मंत्रिमंडल ने 22 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री के ईटानगर दौरे के दौरान अगली पीढ़ी के जीएसटी 2.0 सुधारों और जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत के लिए भी आभार व्यक्त किया। यह दौरा नवरात्रि के पहले दिन हुआ था। मंत्रिमंडल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह प्रस्ताव 11 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया, जो इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पहला दिन था।
कल्याणकारी योजनाओं से अरुणाचल प्रदेश को लाभ
मंत्रिमंडल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार रहा है। राज्य में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 100 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया है, जिससे 8.57 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है।
लगभग 55,000 परिवारों को महिलाओं के नाम पर पक्के मकान मिले हैं। वहीं, 2.28 लाख घरों तक कार्यात्मक नल जल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। मंत्रिमंडल के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर का पहला राज्य बना जिसने जल जीवन मिशन के तहत 100 प्रतिशत संतृप्ति हासिल की।
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) और मुख्यमंत्री आरोग्य अरुणाचल योजना (CMAAY) के तहत 2.26 लाख से अधिक परिवारों को शामिल किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है।
किसान, महिला और युवा सशक्तीकरण पर जोर
मंत्रिमंडल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अन्नदाता, नारी शक्ति और युवा शक्ति पर केंद्रित नीतियों ने आजीविका के अवसरों को मजबूत किया है और राज्य में नई संभावनाएं पैदा की हैं।
अरुणाचल प्रदेश के 1.14 लाख से अधिक किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत पंजीकृत हैं। इनके बैंक खातों में 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।
लगभग एक लाख महिलाओं को 15,999 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा गया है। इनमें से 16,000 से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जबकि 36,000 अन्य महिलाओं को इस लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए चिह्नित किया गया है।
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में 50 सरकारी स्कूलों को गोल्डन जुबली मॉडल स्कूलों के रूप में उन्नत किया गया है। राज्य के प्रत्येक जिले तक 58 खेलो इंडिया केंद्र पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, 156 स्टार्टअप को 5.59 करोड़ रुपये से अधिक की शुरुआती वित्तीय सहायता दी गई है। इनमें से 45.5 प्रतिशत स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूती
मंत्रिमंडल ने राज्य में बुनियादी ढांचे और संपर्क सुविधाओं में हुए सुधारों को भी रेखांकित किया। सेला और नेचिफू सुरंगों से हर मौसम में आवागमन बेहतर हुआ है। इससे सामरिक आवाजाही को मजबूती मिली है और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।
राज्य के पहले ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे डोनी पोलो एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता 10 लाख है। वहीं, तेजू एयरपोर्ट को नए टर्मिनल भवन के साथ उन्नत किया गया है।
वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के पहले चरण में 11 जिलों के 455 गांवों का चयन किया गया। 126 सीमावर्ती गांवों को जोड़ने के लिए 1,022 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण हेतु 2,205 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। दूसरे चरण में म्यांमार और भूटान की सीमाओं से लगे 122 अन्य गांवों को शामिल किया गया है।
मंत्रिमंडल ने कहा कि इन पहलों से सीमावर्ती समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा और सामरिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिल रही है।
जलविद्युत परियोजनाओं से बढ़ेगी आर्थिक क्षमता
मंत्रिमंडल ने अरुणाचल प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उभरते केंद्र के रूप में रेखांकित किया। 30,071 करोड़ रुपये की लागत से 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना विकसित की गई है। इसकी चार इकाइयां चालू हो चुकी हैं, जबकि शेष इकाइयों के जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, पांच और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से लगभग 4,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और नेट जीरो की प्रतिबद्धता को समर्थन मिलेगा।
जनजातीय विरासत और बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा
मंत्रिमंडल ने अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी, जनजातीय और बौद्ध विरासत, संस्कृति तथा परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और पहचान के लिए केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
राज्य के 20 स्वदेशी उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल चुके हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के छह राज्यों में बौद्ध सर्किट विकसित करने की योजना की घोषणा की गई है।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों और चिकित्सा संबंधी पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण तथा डिजिटलीकरण भी किया जा रहा है। राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत ‘प्राइड ऑफ हिल्स’ घटक के तहत अरुणाचल प्रदेश को 4,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
मंत्रिमंडल ने इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए उनके मार्गदर्शन में समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
तकनीकी शिक्षा में भर्ती नियमों को मंजूरी
प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर पारित प्रस्ताव के अतिरिक्त मंत्रिमंडल ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता देने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले लिए।
सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 12 श्रेणियों के पदों के लिए एकसमान और योग्यता आधारित भर्ती नियमों को मंजूरी दी गई। ये नियम अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के वर्ष 2019 के लागू विनियमों के अनुरूप होंगे।
इनमें सरकारी पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्राचार्य के पद, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और प्राध्यापक के पद शामिल हैं। इसके अलावा, वर्कशॉप सुपरिंटेंडेंट, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, प्रयोगशाला सहायक, वरिष्ठ तकनीकी सहायक और सिस्टम एनालिस्ट के पदों तथा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष के पद को भी शामिल किया गया है।
इन नियमों का उद्देश्य एआईसीटीई के डिप्लोमा और डिग्री विनियम, 2019 के अनुरूप पारदर्शी, योग्यता आधारित और एकसमान भर्ती व्यवस्था स्थापित करना है।
महिला हेल्पलाइन-181 के लिए 20 पद स्वीकृत
संकट और आपात स्थिति का सामना कर रही महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए मंत्रिमंडल ने मिशन शक्ति के दिशा-निर्देशों के तहत महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन हेतु 20 पद सृजित करने की मंजूरी दी।
महिला हेल्पलाइन-181 एक टोल-फ्री, 24 घंटे उपलब्ध सेवा है। इसके माध्यम से संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सहायता देने के साथ चिकित्सा सुविधा, आश्रय, कानूनी सहायता, भावनात्मक सहयोग और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ा जाता है।
स्थानीय योगदानकर्ताओं के नाम पर होंगे शैक्षणिक संस्थान
मंत्रिमंडल ने ईस्ट कामेंग जिले के सेप्पा स्थित सरकारी कॉलेज का नाम बदलकर डोंगलो सोनम गवर्नमेंट कॉलेज, वेसांग करने की मंजूरी दी। यह नामकरण स्वर्गीय डोंगलो सोनम के सम्मान में किया गया है, जिन्हें ईस्ट कामेंग जिले और अरुणाचल प्रदेश के विकास में योगदान के लिए जाना जाता है।
इसके अलावा, डापोरिजो स्थित सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम बदलकर लेफ्टिनेंट पुंजी मारा गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, डापोरिजो तथा सरकारी मॉडल डिग्री कॉलेज, डापोरिजो का नाम बदलकर पोपाक बागे गवर्नमेंट मॉडल डिग्री कॉलेज, रीम्पू योरलो करने को भी मंजूरी दी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नए फैसले
मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत विभिन्न श्रेणियों के पदों के ग्रेड पे में वृद्धि को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य वेतन समानता से जुड़ी चिंताओं को दूर करना, कर्मचारियों का मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ाना तथा मरीजों की देखभाल और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करना है।
एक अन्य स्वास्थ्य संबंधी निर्णय में मंत्रिमंडल ने ग्रुप-बी, राजपत्रित, गैर-मंत्रालयी श्रेणी के पांच खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदों के सृजन को मंजूरी दी। इन पदों से राज्य में खाद्य कानूनों को लागू करने वाली व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी दूर करने तथा खाद्य सुरक्षा की निगरानी और नियमों के प्रवर्तन को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य जनस्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

