Bihar News : मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से इलाज करा दृष्टि जी रही स्वस्थ जीवन

बांका। बाराहाट प्रखंड के बरौना गांव के रहने वाले दिवाकर कापरी अपनी बेटी दृष्टि को लेकर चिंतित रहते थे। छोटी सी बच्ची को दिल में छेद और होठ कटे हुए थे। दृष्टि को यह समस्या जन्म के समय से ही थी। निजी अस्पतालों में इलाज कराकर थक गए, लेकिन इस समस्या से निजात नहीं मिली। इलाज के लिए बाहर ले जाना पड़ता। उसके लिए काफी पैसे की जरूरत थी। आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं कि बच्ची का इलाज करा सके। इस चिंता से वे काफी परेशान थे। इसी दौरान छह महीने पहले गांव के एक मास्टर जी से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने दृष्टि के बारे में पूछा और मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के बारे में बताया। इसके बाद दिवाकर कापरी बांका सदर अस्पताल आए और वहां पर आरबीएसके जिला कंसल्टेंट डॉ. अमित से मिले। डॉ. अमित ने पहले उनकी परेशानी को सुना और फिर एक-एक कर उसका समाधान बताया। फिर दृष्टि का इलाज शुरू हुआ। पहले पटना ले जाया गया। वहां से जांच के बाद इलाज के लिए अहमदाबाद भेजा गया। अहमदाबाद में दिल की सर्जरी कर दृष्टि का इलाज किया गया। दृष्टि आज स्वस्थ है। एक साल के बाद उसके कटे होठ का सफलतापूर्वक इलाज कर दिया जाएगा।

दिवाकर कापरी के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना किसी वरदान से कम नहीं है। तभी तो वे कहते हैं, राज्य सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से मेरी बच्ची को नया जीवन मिला है। इस बीमारी का इलाज तो था, लेकिन मैं आर्थिक तौर पर उतना संपन्न नहीं था कि इलाज करा सकूं। गांव के मास्टर जी ने जैसे ही मुझे इस योजना के बारे में बताया मैं तत्काल सदर अस्पताल गया। वहां डॉ. अमित से मिला। डॉ. अमित और पूरी आरबीएसके की टीम ने मेरा भरपूर सहयोग किया। इसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं।

क्या है मुख्यमंत्री बाल हृदय योजनाः

इस योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार की इस योजना को अमलीजामा पहना रही है जिले की आरबीएसके टीम। पीड़ित बच्चों को जिले की आरबीएसके टीम स्क्रीनिंग कर चिह्नित करती है और आवश्यकता के अनुसार समुचित इलाज के लिए पटना या अहमदाबाद भेजा जाता है। आरबीएसके टीम के जिला कंसल्टेंट डॉ. अमित ने बताया, हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी होता है। जिन बच्चों के होठ कटे हैं, उसका तीन सप्ताह से तीन माह के अंदर, जिसके तालु में छेद (सुराग) है, उसका छह से 18 माह एवं जिसके पैर टेढ़े-मेढ़े हैं, उसका दो सप्ताह से दो माह के अंदर शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इसलिए, जो उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे हैं, उसका अभिभावक अपने बच्चों का आरबीएसके टीम के सहयोग से समय पर मुफ्त इलाज शुरू करा सकते हैं। जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। इस कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है।

इलाज से लेकर आवागमन का भी खर्च उठाती है सरकार:

डॉ. अमित कहते हैं कि बाल हृदय योजना के माध्यम से अब तक कई बच्चों का इलाज कराया गया है। इसमें हृदय में छेद के आलावा भी अन्य बीमारियां शामिल हैं। योजना के माध्यम से बच्चों का इलाज पूरी तरह से निःशुल्क कराया जाता है, जिसका वहन सरकार करती है। वहीं, आवागमन का खर्च भी सरकार ही उठाती है। इससे मध्यम और गरीब परिवार के लोगों को आर्थिक मदद मिलती है। इसलिए इस योजना का लाभ सभी को उठाना चाहिए।

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