साहित्य- वेदना
नवीन जोशी ‘नवल’ सो गया साहित्य तो कवि क्या कहे, खो गयी यदि कलम तो कैसे सहे ? रो रही है लेखनी, कागज भरा है आंसुओं से , दुख रहे …
Harpal ki khabar
साहित्य
नवीन जोशी ‘नवल’ सो गया साहित्य तो कवि क्या कहे, खो गयी यदि कलम तो कैसे सहे ? रो रही है लेखनी, कागज भरा है आंसुओं से , दुख रहे …
मैत्री को संबंध का बंधन रूप न देना बस यूँ ही इक दूजे के दिल में संबद्धता से रहना। क्योंकि संबंध तो होता है बंधन से स्थापित जो हो सकता …
नई दिल्ली। जब व्यक्ति अपनी जरूरतों को पूरा कर लेता है। आर्थिक रूप से सक्षम हो जाता है, तो उसके लिए सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों का निर्वहन करना आसान होता …
क्यों और कैसे कहूं कि मेरा कोई घर नहीं मायका का वह घर आज भी तो रह तकता है मेरा अनवरत। बाल्यकाल से यौवन तक कई नादानियां औ अठखेलियां की …
जंगल में तालाब के किनारे एक बबूल का पेड़ था। उसमें लगे पीले फूल अपनी खूशबू चारों और फैला रहे थे। उस दिन आसमान में चारों तरफ काले बादल छाए …
हिंदी साहित्यजगत के चर्चित आलोचक नामवर सिंह ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के अलावा दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लंबे अरसे तक अध्यापन कार्य किया था। बीएचयू …
शतशत नमन उन शूरवीरों को। शहादत की कीमत चुकानी तो पडे़गी। आज सुबह भी वो जागी थी अरूणोदय की लाली से विरहणी की चूड़ी खनकी थी प्रीत मिलन की …
शहादत को सम्मानित कर अमरत्व का उद् घोष करने वालों बस एक पल बस एक पल ठहरो शरीर जल गया पर धरा पर हैं उनकी सिसकती अर्धांगिनी बिखरे सपने के …
धन्य धन्य हे भारत मां जहां ब्रह्मा विष्णु शिव की गाथायें गायी जाती हैं । ऐसे हम देश में रहते हैं जहां गायें पूजी जाती हैं ।। पेड़ों को साक्षी …
वैलेंटाइन डे, एक ऐसा दिन जिसके बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे, आज उस दिन का इंतजार करने वाला एक अच्छा …