साहित्य- वेदना

नवीन जोशी ‘नवल’ सो गया साहित्य तो कवि क्या कहे, खो गयी यदि कलम तो कैसे सहे ? रो रही है लेखनी, कागज भरा है आंसुओं से , दुख रहे …

समय पर ही समझते हैं सामाजिक-सांस्कृृतिक विरासत का महत्व : माधव श्रीराम

नई दिल्‍ली। जब व्यक्ति अपनी जरूरतों को पूरा कर लेता है। आर्थिक रूप से सक्षम हो जाता है, तो उसके लिए सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों का निर्वहन करना आसान होता …

नामवर सिंह: बेहतरीन शिक्षक और प्रखर आलोचक

हिंदी साहित्यजगत के चर्चित आलोचक नामवर सिंह ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के अलावा दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लंबे अरसे तक अध्यापन कार्य किया था। बीएचयू …

धन्य धन्य हे भारत मां

धन्य धन्य हे भारत मां जहां ब्रह्मा विष्णु शिव की गाथायें गायी जाती हैं । ऐसे हम देश में रहते हैं जहां गायें पूजी जाती हैं ।। पेड़ों को साक्षी …

बाजारवाद के इस दौर में प्रेम भी तोहफों का मोहताज़ हो गया

वैलेंटाइन डे, एक ऐसा दिन जिसके बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे, आज उस दिन का इंतजार करने वाला एक अच्छा …