नाबार्ड नई दिल्ली कार्यालय ने पहली बार आयोजित की शाखा प्रबंधकों की क्षमता निर्माण कार्यशाला

 

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (DStCB) के शाखा प्रबंधकों के लिए पहली बार क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। 10 अगस्त 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सहकारी बैंकिंग से जुड़े विकासात्मक, नियामकीय, पर्यवेक्षी और व्यवसाय विस्तार से संबंधित पहलुओं पर शाखा प्रबंधकों की जानकारी एवं क्षमता को बढ़ाना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री नवीन कुमार रॉय ने किया। उन्होंने वित्तीय समावेशन और स्थानीय आर्थिक विकास में सहकारी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के सतत विकास के लिए बेहतर शासन व्यवस्था, आधुनिक तकनीक को अपनाना, ग्राहक-केंद्रित सेवाएं और संस्थागत क्षमता निर्माण आवश्यक है।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इनमें आरबीआई के एजीएम श्री हरीश झिरवाल, जीएनसीटीडी के उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां श्री अनिल कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र उजवा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी.के. राणा, एनसीयूआई की निदेशक श्रीमती संध्या कपूर सहित नाबार्ड के प्रधान कार्यालय और नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने भाग लिया।

विशेषज्ञ सत्रों में एकीकृत लोकपाल योजना, डीईए फंड, केवाईसी अनुपालन, सहकारी शासन, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन, किसानों की ऋण आवश्यकताओं, राष्ट्रीय सहकारी नीति तथा व्यवसाय में विविधीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसके अलावा एमएसएमई वित्तपोषण और डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से सहकारी बैंकों के लिए नए कारोबारी अवसर तलाशने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधकों और वरिष्ठ अधिकारियों को सहकारी बैंकिंग में पेशेवर दृष्टिकोण, व्यवसाय विविधीकरण और तकनीक आधारित बदलाव पर विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।

समापन सत्र में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने सहकारी बैंकों से किसानों, बुनकरों, कारीगरों और अन्य वंचित वर्गों की ऋण आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों, विशेषकर अर्ध-शहरी और शहरी गरीब परिवारों तक भी वित्तीय सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

नाबार्ड के जमीनी स्तर पर सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के दृष्टिकोण को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों से दिल्ली में कम से कम एक सशक्त और जीवंत प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS)/बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समिति (MPACS) के पुनरुद्धार अथवा विकास को संभव बनाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसी संस्था नए कारोबारी अवसरों को खोलने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन को गहरा करेगी, लोगों की ऋण एवं सरकारी योजनाओं तक पहुंच बेहतर बनाएगी और अंतिम छोर तक सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगी। इससे सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के “सहकार से समृद्धि” के विजन को भी मजबूती मिलेगी।

दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के कार्यवाहक प्रबंध निदेशक श्री राजीव कुमार कादयान ने शाखा प्रबंधकों से नवाचार, ग्राहक-केंद्रित सेवाओं और डिजिटल तकनीक को अपनाकर सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में परिवर्तन का नेतृत्व करने का आह्वान किया।

नाबार्ड ने एक बार फिर दिल्ली में जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने तथा सतत और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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