बारिश , मुम्बई और छोटे शहर

नई दिल्ली / टीम डिजिटल।  बारिश ने मुम्बई को फिर अपनो लपेट में ले लिया है । सारे चैनल मुम्बई की बारिश से बेहाल लोगों की जानकारी दे रहे हैं । हर वर्ष बारिश में मुम्बई की यही हालत होती है । छोटा सा टापू बन जाती है । रेल से लेकर हवाई जहाज तक सब कुछ थम जाता है । लोकल ट्रेन और स्कूल बंद । फिल्म वाले घर में । आम आदमी पानी की मार सहता हुआ । यह हाल मुम्बई का लेकिन कोई नियंत्रण नही । कोई योजना नहीं । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस आज घायलों को देखने अस्पताल जायेंगे जो इमारत के गिर जाने से घायल हो गये ।
क्या मुम्बई की ही चिंता है ? कभी दूसरे छोटे शहरों को बारिश में नहर नाले और दरिया बनते देखा है ? क्या अपना हिसार इनसे अलग है या हांसी पर बारिश मेहरबान है ? नहीं । इन शहरों का हाल भी बुरा दिखता है । पहले तो बारिश का इंतजार और फिर राहत गर्मी से तो मिल जाती है लेकिन मुसीबत रूप बदल लेती है । सब जगह पानी ही पानी । कारें पानी में फंसी हुईं । जनजीवन ठप्प । दुकानदारी  खत्म । स्कूलों दफ्तरों में हाजिरी कम । यह सब किसी योजना में नहीं आता । बारिश की बजाय बाढ के प्रबंधों पर उपायुक्त बैठकें करते हैं लेकिन गलियों नालियों पर नहीं । ये क्यों बंद हो जाते हैं ? इनकी सफाई की देखरेख के लिए भी ज्ञापन देने पडते हैं । बार बार मनुहार करनी पडती है । तब कहीं जाकर सुनवाई होती है ।

बाढ की संभावनाएं सामने हैं 
और नदियों के किनारे घर बने हैं ,,,,
ऐसा दुष्यंत कुमार का शेर है । यह शेर बहुत शानदार ढंग से व्यक्त करता है । 
 

कमलेश भारतीय ,
  वरिष्ठ पत्रकार  

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