नई दिल्ली। अपोलो अथीना, एशिया का पहला समर्पित महिला कैंसर सेंटर, परिशुद्ध ऑन्कोलॉजी का पक्षपोषण करते हुए स्तन कैंसर प्रबंधन को नई दिशा दे रहा है। यह केंद्र कैंसर देखभाल को अधिक परिशुद्ध बनाकर और लंबे समय से बनी रही अस्पष्टता को साक्ष्य-आधारित सुस्पष्टता प्रदान कर स्तन कैंसर प्रबंधन को पुनः परिभाषित कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘अपोलो अथीना कैंसर कॉन्क्लेव 2026’ में “स्तन कैंसर प्रबंधन में अस्पष्टता से सुस्पष्टता की ओर अग्रसर” के थीम पर आयोजित चर्चा में यह प्रतिबद्धता प्रमुखता से प्रदर्शित की गई। इस सम्मेलन के माध्यम से अस्पष्टता और भय-प्रेरित निर्णयों से हटकर सुस्पष्ट, साक्ष्य-आधारित, परिशुद्ध देखभाल की ओर अग्रसर होने को महत्व दिया गया है, जिसमें जीवन रक्षा के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जाती है।
अपोलो अथीना की स्थापना, भारत में स्तन कैंसर के उपचार को अनिश्चितता से सुस्पष्टता की ओर ले जाने के एक सरल लेकिन सशक्त संकल्पना पर आधारित है। इस संकल्पना को वास्तविकता बनाने के लिए, इस सम्मेलन में देश के कई अग्रणी ब्रेस्ट सर्जन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, ब्रेस्ट रीकंस्ट्रक्शन सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ एक-साथ आएँगे, जिससे यह एक ऐसा मंच बना जाएगा जहाँ न केवल वैश्विक साक्ष्य के साथ भारत की नैदानिक वास्तविकता का मेल देखने को मिलता है बल्कि रोगी के उपचार क्रम में अत्याधुनिक प्रगति को ध्यान में रखते हुए नैदानिक निर्णय लेने को प्रोत्साहित किया गया है।
इस संकल्पना के पीछे की अत्यावश्यकता को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और 2020 के अनुमानों के अनुसार महिलाओं को होने वाले सभी प्रकार के कैंसरों में से स्तन कैंसर का आँकड़ा 27% और कैंसर से होने वाली मौतों का आँकड़ा लगभग 10% है। आज के समय भारत में चार में से एक महिला रोगी 40 वर्ष से कम आयु की हैं, जबकि 30% महिलाएँ ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे आक्रामक कैंसर का शिकार हैं। 2030 तक आर्थिक बोझ बढ़कर 13.96 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, ऐसे में तेज़, बेहतर और साक्ष्य-आधारित देखभाल की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है – और अपोलो अथीना का यह सम्मेलन ठीक इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए आयोजित किया गया है।
इस प्रगति के बावजूद, उपचार में एक बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है। पश्चिमी देशों में, शुरुआती चरण के स्तन कैंसर के लगभग 70% रोगियों की स्तन संरक्षण सर्जरी की जाती है – भारत में, यह आँकड़ा 25% से भी कम है। कई महिलाओं को अब भी सामान्य मैस्टेक्टॉमी या फुल एक्सिलरी क्लीयरेंस करवानी पड़ती है, लेकिन साक्ष्यों की मानें तो अब ऐसी स्थितियों में कम आक्रामक प्रक्रियाएँ अपनाना संभव है। आधुनिक ऑन्कोलॉजी “केवल जीवन रक्षा” से आगे बढ़ चुकी है – समय की माँग जीवन रक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण जीवन को एहमियत देना है। इस अंतर को पाटना अथीना के सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है।
आज, हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग, मेटिकुलस ट्यूमर कार्टोग्राफी, नियोएडजुवेंट सिस्टमिक थेरेपी और प्रिसिजन ऑन्कोप्लास्टिक रीकंस्ट्रक्शन तकनीकों में हुई प्रगति से स्तन कैंसर प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। इस सम्मेलन में चिकित्सकों द्वारा एक्सिलरी डी-एस्केलेशन की तत्परता, मेटास्टैटिक ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में सिस्टमिक उपचार के इष्टतम अनुक्रमण और संरक्षण से पुनर्निर्माण तक की उपचार विधियों को समझने पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के दौरान की जाने वाली चर्चाओं में मल्टीफोकल रोग में इमेजिंग-आधारित निर्णयों, प्रिसिजन ट्यूमर मैपिंग के साथ-साथ इमेजिंग, पैथोलॉजी और उपचार के अभिसरण जैसे विषयों पर भी विमर्श किया जाएगा, साथ ही “कैंसर के बाद की देखभाल का महत्व” जैसे विषय पर भी चर्चा होगी। इन सभी विमर्शों से यह प्रकट होता है कि सभी रोगियों के लिए एक ही प्रकार की उपचारात्मक सर्जरी नहीं, बल्कि अलग-अलग रोगियों की विशिष्ट स्थितियों के अनुसार सभी के लिए वैयक्तिकृत, बहु-विषयक और साक्ष्य-आधारित देखभाल अपनाने की आवश्यकता है।
अपोलो हॉस्पिटल्स की कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. प्रीथा रेड्डी ने कहा, “अपोलो अथीना महिला कैंसर सेंटर में हमारा मुख्य उद्देश्य भारत में साक्ष्य-आधारित, परिशुद्ध ऑन्कोलॉजी पद्धतियों को तेजी से अपनाना है। हमारा लक्ष्य वैश्विक विशेषज्ञता को बहु-विषयक सहयोग के साथ समेकित कर यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक महिला को विज्ञान, नवाचार और दीर्घकालिक कल्याण पर आधारित उपचार निर्णयों से लाभ मिले।”
अपोलो अथीना महिला कैंसर सेंटर की प्रिंसिपल लीड डॉ. गीता कदयाप्रथ ने कहा, “स्तन कैंसर का प्रबंधन अधिक सुस्पष्टता के युग में प्रवेश कर रहा है, जहाँ उपचार के निर्णय, डर कर नहीं बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर लिए जा रहे हैं। इमेजिंग, ट्यूमर मैपिंग और ऑन्कोप्लास्टिक विशेषज्ञता में प्रगति के साथ, हम वैयक्तिकृत उपचार प्रदान करने को महत्व देते हैं जो जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए ऑन्कोलॉजिकल सुरक्षा सुनिश्चित करता है।”
अपोलो अथीना महिला कैंसर सेंटर में मेडिकल एवं प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की प्रिंसिपल लीड डॉ. ज्योति वाधवा ने कहा, “आज के समय में मेडिकल और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में सभी रोगियों के लिए एक ही प्रकार का उपचार कारगर नहीं रह गया है। ट्यूमर बायोलॉजी की गहरी समझ और टार्गेटेड थेरेपी की भूमिका बढ़ने के साथ, हम प्रत्येक रोगी के विशिष्ट प्रोफाइल के अनुसार सिस्टेमिक उपचार को अनुकूलित कर सकते हैं, जिससे उपचार की प्रभावकारिता बढ़ती और कम-से-कम नुकसान होता है। स्तन कैंसर के इलाज का भविष्य परिशुद्धता में निहित है और वह भविष्य दस्तक दे चुका है।”
अपोलो अथीना महिला कैंसर सेंटर में महिला इमेजिंग की प्रिंसिपल लीड डॉ. ज्योति अरोरा ने कहा, “आज के समय में AI के उपयोग से उन्नत इमेजिंग के ज़रिए न केवल कैंसर का निदान किया जा रहा है, बल्कि इसकी उपचार विधियों को भी पुनः परिभाषित किया जा रहा है। क्रायोएब्लेशन जैसी न्यूनतम आक्रामक तकनीकों से हम चुनिंदा रोगी समूहों में पारंपरिक सर्जरी के बिना कैंसर को फ्रीज करके नष्ट कर सकते हैं और प्रिसिजन ट्यूमर मैपिंग के माध्यम से हम महिलाओं को सुरक्षा या परिणामों से समझौता किए बिना कम आक्रामक सर्जिकल विकल्प प्रदान कर सकते हैं।”
सम्मेलन से पहले हुए संवाद में भाग लेने वाले अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ज़ोर देते हुए बताया कि वैश्विक साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि सावधानीपूर्वक वांछित सर्जिकल डी-एस्केलेशन से कैंसर नियंत्रण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। सहयोगात्मक मंचों के माध्यम से इस प्रकार की प्रगतियों को रोज़ाना के नैदानिक प्रथाओं में बदलना आसान बन जाता है ताकि भारत में वैयक्तिकृत, साक्ष्य-आधारित स्तन कैंसर देखभाल को प्रबलता से अपनाया जा सके।

