विद्यापति का सामाजिक सरोकार

आज जब हम धर्म और सामाजिक सरोकारों के द्वंद्व से जूझ रहे हैं, तब क्या हमारे पूर्ववर्ती समाज से कुछ लिखित या मौखिक परंपरा की विरासत है, जिसका फलक सर्वकालिक …

क्यों आएं इनको शर्म-ओ-हया ?

दिल्ली में इन दिनों सैकड़ो संस्थाएँ स्थापित हो गयी है जिनका समाज के काम या भलाई का कोई उद्देश्य नहीं होता बस राजनीति करण और चाटुकारिता के पंगु हो गए …

मैथिली सहित सभी भारतीय भाषाओं के उन्नयन के लिए पुस्तक न्यास संकल्पित: बलदेव भाई शर्मा

नई दिल्ली। भारतीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा कहते हैं कि हम निरंतर भारतीय भाषाओं के उन्नयन के लिए कार्य कर रहे हैं। कोई भी भाषा न …

सबसे बडा क्या 

वे हमारे परिचित हैं । लगभग रोज ही अपने परिवार की उलझनों पर बात करते रहते हैं । एक दिन शाम को हम लोग उनके घर गये तो उनकी पत्नी …

बीएचयू के कुलपति के रूप में मात्र एक रूपया लेते थे डाॅ लालजी सिंह

धनंजय गिरि भारत के मशहूर डीएनए वैज्ञानिक और काशी हिंदी विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है। डीएनए फिंगरप्रिंट …

मैथिली गीतिकाव्य को आगे बढ़ा रहे हैं मणिकांत

सामाजिक सांस्कृति संस्था “सुगति सोपान” और “एमलिओर फाउंडेशन” के सौजन्य से हुआ आयोजन नई दिल्ली। मैथिली भाषा गीतिकाव्य परंपरा को आकाशवाणी दरभंगा के संवाददाता व भारत निर्वाचन आयोग के आइकान …

संस्कृत ही बचाएगा संस्कार

सुशील देव नई दिल्ली। द्वारका के एमआरवी स्कूल में संस्कृत कुटुंब सम्मेलन था। मुझे भी वहां जाने का मौका मिला। मैंने देखा कि छोटे-छोटे बच्चे, उनके माता-पिता, अभिवावक और शिक्षक …

मैथिल भाषियों के लिए विश्व पुस्तक मेला में नई शुरुआत

विश्व पुस्तक मेला-2018 में मैथिली स्टाल। डाॅ सविता खान और अमित आनंद के मेहनत से सपना हुआ साकार। नई दिल्ली। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित 26वीं नई दिल्ली श्व पुस्तक …

केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने किया एसडीआरएस के विशेषांक का विमोचन

नई दिल्ली। सोसाइटी फाॅर डिसेब्लिटी एंड रिहेबिलेशन स्टडीज, नई दिल्ली के तत्वावधान में प्रकाशित इंटरनेशनल जर्नल आॅफ डिसेब्लिटी स्टडीज के विशेषांक का केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने विमोचन …

सामाजिकता के भाव से सशक्त होंगे दिव्यांग

विश्व विकलांगता दिवस पर विशेष अभी तक विकलांगता को सिर्फ एक चिकित्सकीय मॉडल के संदर्भ में ही देखा-समझा जाता रहा है। लेकिन बदलते समय में उसके सामाजिक मॉडल पर जोर …