झामुमो ने बोला भाजपा पर हमला, जारी किया घोषणापत्र

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने सवाल किया है कि लोकसभा का चुनाव भारतीय जनता पार्टी लड़ रही है या भारत की सेना? उन्होंने कहा कि रोटी और रोजगार के मुद्दे इस बार चुनाव से गायब हैं. भाजपा राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नाम पर चुनाव लड़ रही है. श्री सोरेन ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रवाद की व्यापारी है. राष्ट्रवाद विरोधी पार्टी है. झामुमो नेता लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का निश्चय पत्र ‘उठो, लड़ो, बदलो’ जारी करने के बाद यहां शनिवार को प्रेस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि यह पार्टी परमाणु बम के नाम पर धमकियां दे रही है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. देश के महान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और इंदिरा गांधी ने परमाणु परीक्षण किये, लेकिन कभी उन्होंने किसी को इसकी धमकी नहीं दी.

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए जारी निश्चय पत्र ‘उठो, लड़ो, बदलो’ में केंद्र और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को इन्हीं शब्दों में परिभाषित किया है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मोरहाबादी स्थित सरकारी आवास पर गुरुजी की मौजूदगी में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने शनिवार को पार्टी का निश्चय पत्र जारी किया. पांच खंडों में यह पत्र जल-जंगल-जमीन, रोजगार सृजन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, मध्यम वर्ग महंगाई एवं गरीबी और सामाजिक न्याय एवं मानवाधिकार की बात करता है.

पहले खंड में जल, जंगल जमीन की रक्षा की बात है. इसमें कहा गया है कि केंद्र में महागठबंधन की सरकार बनी, तो भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून 2018 (झारखंड) एवं भूमि बैंक की नीति को रद्द कराया जायेगा. ईचा-खरकई तथा मंडल डैम जैसे झारखंड विरोधी सिंचाई परियोजनाओं की पुन: समीक्षा करायी जायेगी. वनाधिकार कानून में हुए बदलावों को निरस्त किया जायेगा. वन भूमि को गैर वन उपयोग हेतु ग्राम सभा के पूर्व लिखित अनुमति के प्रावधान को फिर से शामिल कराया जायेगा.

निश्चय-2 में रोजगार सृजन से जुड़ी 10 बातें हैं. इसमें कहा गया है कि देश में बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर है. पांच साल में बेरोजगारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 7.5 फीसदी हो गयी है. झारखंड में यह आंकड़ा 10 फीसदी तक चला गया है. इस समस्या से निबटने के लिए कदम उठाने की बात झामुमो के निश्चय पत्र में कही गयी है. यह पत्र कहता है कि वन क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन तथा इन क्षेत्रों में अधिक रोजगार सृजन के लिए खनन की बजाय पर्यटन को प्राथमिकता दिलायेंगे.

निश्चय पत्र के तीसरे खंड में शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़ी बातें हैं. इसमें कहा गया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का विरोध करेगी. सरकारी संस्थानों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी. कॉर्पोरेट कंपनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) तथा जिला खनन कोष से गांवों में उच्चस्तरीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा अस्पताल खुलवाने की कोशिश करेंगे. निश्चय पत्र के चौथे खंड में मध्य वर्ग, महंगाई एवं गरीबी की बात की गयी है. इसमें गरीब परिवारों को हर साल 72 हजार रुपये देने के कांग्रेस के ‘न्याय योजना’ का समर्थन किया गया है. साथ ही कहा गया है कि महागठबंधन की सरकार बनी, तो गरीबों को मिल रहे आवासों के आकार को बड़ा करने और उसे अधिक सुविधायुक्त बनाने का प्रयास किया जायेगा. आयकर छूट की सीमा 8 लाख रुपये तथा महिलाओं के लिए इसे 10 लाख रुपये करने का प्रयास होगा. पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की बात भी झामुमो के निश्चय पत्र के इस खंड में कही गयी है.

अंतिम और पांचवें खंड में सामाजिक न्याय एवं मानवाधिकार के बारे में झामुमो क्या करना चाहती है, यह लिखा है. इसमें लिखा है कि केंद्र में झामुमो समर्थित सरकार बनी, तो छोटे-छोटे मामलों में पुलिस द्वारा लोगों को गिरफ्तार करने की शक्ति को समाप्त कराने का प्रयास किया जायेगा. एससी/एसटी अत्याचार निरोधी कानून को कमजोर करने के षड्यंत्र का पुरजोर विरोध किया जायेगा. इसे और भी सशक्त एवं प्रभावी बनाने का प्रयास किया जायेगा. सामाजिक सेवाओं एवं राशन में आधार की अनिवार्यता लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर रहा है. झामुमो आधार की अनिवार्यता खत्म कर उसे स्वैच्छिक बनाना चाहती है.

 

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