तकनीक के सहारे विकलांगों को बनाएं सबल

विश्व विकलांगता दिवस 3 दिसंबर पर विशेष लेख मुझे घोर आश्चर्य होता है कि ज्यादातर लोग ये भी नहीं जानते कि उनके घर के आस-पास समाज में कितने लोग विकलांग …

बरसात – रंजना झा

कहानी: बरसात कथाकार: रंजना झा होगा वसंत ऋतुराज लेकिन विरह, अभिसार और कजरी तो बरसात में ही संभव है। वसंत अगर ऋतुराज है तो बरसात मधुमास। इसका अर्थ यह भी …

उम्मीद का रंग

कुमकुम झा मत कहो कि रंगहीन हो गया है उम्मीदों का रंग मत जोड़ो उस इन्द्रधनुष के संग किसी भोर का सम्बन्ध ? कई बार ऐसा भी हुआ है कि …

असली चुनौती

एक बार की बात है। गौत्तम बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ किसी शहर में प्रवास कर रहे थे। जब उनके शिष्य शहर घूमन निकले तो लोगों ने उन्हें बहुत …

रविवार

  रविवार हर बार आता है बाजार भी लगता है कोलेबिरा में माँ हर बार चली जाती पीठ पर बाँधे भाई घर में आ जाती है सहेलियाँ खेलने कितकित ढेंगा …

हे, देवी बन जाओ महादेवी !

आखिर वो कहना चाहती है कुछ। साझा करना चाहती है अपनी पीड़ा। फिर बार-बार चाहकर भी क्यों रह जाती है चुप्प। घंटों साथ बैठना। बतियाना। दुनियादारी की बातें। समाज की …

सुख की आशा

 फ्रेडरिक नीत्शे ने कहा है: मैं हंसता हूं, लोग सोचते हैं मैं खुश हूं। मैं हंसता हूं, इसलिए कि कहीं रोने न लगूं। अगर न हंसा तो रोने लगूंगा। हंस-हंस …

दो दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन 25-26 नवम्बर को

नई दिल्ली। भारतीय भाषाओं के समुचित विकास हेतु एक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन 25 और 26 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस आयोजन …